पत्रकार संतराज यादव


गोरखपुर स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के विरोध में चल रहे कार्य बहिष्कार के दौरान नौ बैनामों की रजिस्ट्री होने से अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा।नाराज वकीलों ने सोमवार को कचहरी परिसर में जमकर हंगामा किया और एक गुमटी को पलटकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला अधिवक्ता एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ता 30 जून तक न्यायिक कार्यों के बहिष्कार पर थे। अधिवक्ताओं का आरोप है कि बहिष्कार के दौरान नियमों का उल्लंघन कर नौ बैनामों को स्वीकार किया गया। उनका कहना है कि इंडेक्स तैयार न होने और ऑनलाइन रिकॉर्ड में बैनामे न दिखने के बावजूद रजिस्ट्री की गई, जो नियम विरुद्ध है। 
घटना से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने कचहरी में प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ वकीलों ने तोड़फोड़ भी की। प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष कृष्ण दामोदर पाठक, कोषाध्यक्ष उपेंद्र धर दुबे, उपाध्यक्ष सचिन शुक्ल समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल रहे। 
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अधिवक्ता एसोसिएशन ने बैठक बुलाई। बैठक में दस्तावेज लेखन का कार्य करने वाले अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। एसोसिएशन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है। एसोसिएशन अध्यक्ष प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि सर्वसम्मति से 3 जुलाई तक न्यायिक कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को एसोसिएशन की आम सभा की बैठक होगी, जिसमें कार्य बहिष्कार वापस लेने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
इस बीच, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने 4 जून 2026 को जारी अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसके विरोध में अधिवक्ता आंदोलन कर रहे थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब 4 जून 2026 से पहले लागू पुरानी पंजीकरण व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी। इसके तहत संबंधित उप निबंधक कार्यालयों में खंडपीठ, विक्रेता, क्रेता और अधिवक्ताओं की उपस्थिति में पहले की तरह ही दस्तावेजों का पंजीकरण किया जाएगा। अधिवक्ताओं ने राजकोष से कटी हुई रसीद की जानकारी भी ली, जिसमें नौ बैनामों की रसीद कटी मिली। कचहरी खुलते ही अधिवक्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया था।

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