जिला सहकारी बैंक के कर्मचारियों द्वारा आयोजित भंडारे के बाद यदि सड़क पर ही जूठी पत्तल, दोने और गिलास फेंक दिए गए, तो यह सामाजिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।


जिला सहकारी बैंक के कर्मचारियों द्वारा आयोजित भंडारे के बाद यदि सड़क पर ही जूठी पत्तल, दोने और गिलास फेंक दिए गए, तो यह सामाजिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

"भंडारा पुण्य का कार्य है, लेकिन उसके बाद सड़क को कूड़ाघर बना देना कहाँ तक उचित?"

एक ओर स्वच्छता का संदेश दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों पर फैली गंदगी आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। यदि ऐसा हुआ है, तो संबंधित लोगों को आगे आकर सफाई करानी चाहिए और भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचना चाहिए।

"पुण्य कमाइए, लेकिन शहर को गंदा मत बनाइए!"

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