विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रो. पी.बी. सिंह ने किया पुस्तक का भव्य विमोचन


 

शाहजहांपुर, स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. प्रतिभा सक्सेना द्वारा संपादित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों “कृत्रिम बुद्धिमत्ता : अवसर एवं चुनौतियाँ” तथा “विकसित भारत @ 2047 : सतत विकास एवं समृद्धि की ओर कदम” का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया।
पुस्तकों का लोकार्पण विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के डीन प्रोफेसर अनुराग अग्रवाल, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. के.के. वर्मा, वर्धमान कॉलेज के वाणिज्य विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं सह-संपादक डॉ. राजीव कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर देवेंद्र सिंह सहित अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
डॉ. प्रतिभा सक्सेना की पहली पुस्तक “कृत्रिम बुद्धिमत्ता : अवसर एवं चुनौतियाँ” का संयुक्त संपादन डॉ. प्रतिभा सक्सेना, वर्धमान कॉलेज के डॉ. राजीव कुमार अग्रवाल तथा मगध विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन विभाग की निदेशक डॉ. कुमारी दीप रानी ने किया है।
वहीं दूसरी पुस्तक “विकसित भारत @ 2047 : सतत विकास एवं समृद्धि की ओर कदम” का संयुक्त संपादन डॉ. प्रतिभा सक्सेना, वर्धमान कॉलेज बिजनौर के डॉ. राजीव कुमार अग्रवाल तथा टी.एस. मिश्रा विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग की डॉ. मीनाक्षी नाग द्वारा किया गया है।
इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. अवनीश मिश्रा एवं स्वामी शुकदेवानंद ट्रस्ट के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने डॉ. प्रतिभा सक्सेना को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभाशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शोध एवं अकादमिक कार्य ज्ञान-विस्तार के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह में एस.एस. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार आजाद, संगीत विभाग की डॉ. कविता भटनागर, कला संकाय के डीन डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. बरखा सक्सेना, मीडिया प्रभारी डॉ. जे.एस. ओझा, डॉ. शिशिर मिश्रा, प्रोफेसर कमलेश बाबू, प्रोफेसर देवेंद्र सिंह, डॉ. अपर्णा त्रिपाठी, डॉ. संतोष प्रताप सिंह, डॉ. रूपक श्रीवास्तव, प्रोफेसर अजीत सिंह चारक सहित अनेक शिक्षकों एवं विद्वानों ने डॉ. प्रतिभा सक्सेना को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य तथा निरंतर प्रगति की कामना की।
यह उपलब्धि न केवल डॉ. प्रतिभा सक्सेना की शैक्षणिक एवं शोधपरक प्रतिभा का परिचायक है, बल्कि स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता एवं शोध संस्कृति को भी नई पहचान प्रदान करती है।

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