"संविधान और बहुजन महापुरुषों का अपमान अब बर्दाश्त नहीं" : राजेश कुमार सिद्धार्थ


सीतापुर। डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने जनपद सीतापुर के प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, तथागत गौतम बुद्ध, चक्रवर्ती सम्राट अशोक तथा बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों के सम्मान और विचारधारा की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया भेदभावपूर्ण है तथा बहुजन समाज के महापुरुषों से जुड़े निर्माण कार्यों को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि देश संविधान से चलता है, किसी विशेष विचारधारा या सामाजिक व्यवस्था से नहीं। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और शासन-प्रशासन का दायित्व है कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों और महापुरुषों के सम्मान की रक्षा करे।

उन्होंने कहा कि जनपद सीतापुर में बहुजन समाज के महापुरुषों के सम्मान में बनाए जा रहे पार्कों, स्मारकों और प्रवेश द्वारों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सिद्धार्थ ने विशेष रूप से चक्रवर्ती सम्राट अशोक पार्क और संविधान पार्क के निर्माण कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन द्वारा रोकने का प्रयास किया गया, जिससे बहुजन समाज में रोष व्याप्त है।

मंदिरों और अन्य धार्मिक निर्माणों पर उठाए सवाल

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि जनपद के विभिन्न हिस्सों में सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थलों तथा तालाबों की भूमि पर अनेक धार्मिक निर्माण और मंदिर बने हुए हैं अथवा बनाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि इन निर्माणों को लेकर प्रशासन का रवैया क्या रहा है और कितने मामलों में विधिक अनुमति प्राप्त की गई है।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन कानून और नियमों के आधार पर कार्य कर रहा है तो उसे पूरे जिले में एक समान नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन सार्वजनिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराए कि जनपद की सभी तहसीलों में कितने धार्मिक निर्माणों को औपचारिक अनुमति प्रदान की गई है और कितने निर्माण बिना अनुमति के संचालित हैं।

सिद्धार्थ ने आरोप लगाया कि बहुजन समाज के महापुरुषों के नाम पर होने वाले कार्यों को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सख्ती दिखाता है, जबकि अन्य मामलों में उदार रवैया अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की कार्रवाई हो तो वह सभी के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए।

प्रशासन पर राजनीतिक प्रभाव में कार्य करने का आरोप

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि जिले के कुछ अधिकारी निष्पक्ष प्रशासनिक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक दबाव में कार्य करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद के विभिन्न प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का रवैया संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को कमजोर करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने जिस संविधान की रचना की, उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान प्रदान करना था। यदि किसी समुदाय को उसके महापुरुषों के सम्मान से वंचित किया जाता है तो यह संविधान की भावना के विपरीत है।

बहुजन समाज के सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बहुजन समाज के लोग अपने महापुरुषों के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती सम्राट अशोक, महात्मा ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहू जी महाराज, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा तथागत गौतम बुद्ध के विचार सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के सम्मान में बनाए जाने वाले स्मारक, पार्क और प्रतिमाएं केवल प्रतीक नहीं बल्कि सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के केंद्र हैं। यदि ऐसे कार्यों में बाधा डाली जाती है तो समाज के लोगों में असंतोष स्वाभाविक है।

30 जून को मुख्यमंत्री आवास तक पदयात्रा का ऐलान

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने घोषणा की कि यदि बहुजन समाज के महापुरुषों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 30 जून 2026 को सिधौली स्थित डॉ. आंबेडकर पार्क बहादुरपुर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास, लखनऊ तक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा संविधान, सामाजिक न्याय और बहुजन समाज के सम्मान के लिए समर्पित होगी। पदयात्रा में प्रदेश भर से बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, संविधान प्रेमी, युवा, महिलाएं तथा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे।

सिद्धार्थ ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वह जनभावनाओं का सम्मान करे और समय रहते समाधान निकाले ताकि किसी प्रकार के टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो।

सरकार और प्रशासन से की मांग

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सरकार और प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के महापुरुषों के सम्मान में बनने वाले पार्कों, स्मारकों और प्रतिमाओं को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत अनुमति प्रदान की जाए। जिन मामलों में आवेदन लंबित हैं, उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि प्रशासन सभी प्रकार के सार्वजनिक निर्माणों के संबंध में समान नीति अपनाए तथा किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न किया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल भावना समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित है और शासन-प्रशासन को इन्हीं मूल्यों के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

आंदोलन की चेतावनी

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा बहुजन समाज की भावनाओं और मांगों की अनदेखी की गई तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के लोग अपने महापुरुषों के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित व्यवस्था ही देश को मजबूत बना सकती है। उन्होंने प्रशासन से पुनः आग्रह किया कि वह निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करे तथा समाज में सौहार्द और विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि "संविधान और बहुजन महापुरुषों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।"

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