माननीय न्यायालय द्वारा जारी धारा 82 Cr.P.C की आदेशिका का चौकी प्रभारी हनुमानगंज, थाना रूधौली, जनपद बस्ती द्वारा किया गया तामीला।
जनपद बस्ती के थाना रूधौली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बढ़या राजा निवासी अभियुक्त जीत
रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय
रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय
महमूदाबाद (सीतापुर)। तहसील क्षेत्र महमूदाबाद में कुछ समय पूर्व प्रकाश में आया ₹90,000 की कथित रिश्वत, वादाखिलाफी और एक युवक की असमय मौत का संवेदनशील मामला अब प्रशासनिक सुस्ती और लीपापोती की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। समाचार पत्र में इस गंभीर प्रकरण के उजागर होने के बाद, प्रशासन ने आरोपी लेखपाल के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय, महज उनका कार्यक्षेत्र बदलकर पूरे मामले की इतिश्री कर दी है। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैए से अब पीड़ित परिवार सहित आम जनता में भारी आक्रोश है और कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
ग्राम मरखापुर (परगना सदरपुर) निवासी राम शंकर वर्मा ने उप जिलाधिकारी व तहसीलदार महमूदाबाद को शपथ पत्र के साथ दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि:
उनके भतीजे दीपक कुमार से हल्का लेखपाल रंजना ने कृषि भूमि का पट्टा कराने के नाम पर ₹90,000 की मोटी रकम ली थी। यह लेन-देन सदरपुर स्थित दीपू होटल में हुआ था।
लंबे समय तक पट्टा न होने पर जब दीपक ने अपने पैसे वापस मांगे, तो लेखपाल द्वारा उसे कथित रूप से डांटा-फटकारा गया और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
इस मानसिक तनाव और सदमे को न झेल पाने के कारण 20 फरवरी 2026 को दीपक कुमार की असमय मृत्यु हो गई। पीड़ित परिवार ने इस मौत का सीधा जिम्मेदार लेखपाल के मानसिक उत्पीड़न को ठहराया था।
जांच के नाम पर सिर्फ तबादला, खड़े हुए ये 5 तीखे सवाल
समाचार पत्र में खबर छपने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तो हुई, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। तहसीलदार उमाशंकर त्रिपाठी ने शुरुआत में अनभिज्ञता जताई थी, परंतु मीडिया के हस्तक्षेप के बाद आरोपी लेखपाल का कार्यक्षेत्र बदल दिया गया। इस हल्की कार्रवाई ने प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
1. शपथ पत्र पर शिकायत तो कार्रवाई इतनी ढीली क्यों? यदि लेखपाल बेकसूर हैं, तो पीड़ित पक्ष ने जिलाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र (Affidavit) पर इतनी गंभीर शिकायत क्यों दर्ज कराई? शपथ पत्र पर झूठी शिकायत करने का जोखिम कोई भी सामान्य नागरिक नहीं उठाता।
2. भ्रष्टाचार की बू या प्रशासनिक संरक्षण? गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार और एक व्यक्ति की मौत से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में सिर्फ कार्यक्षेत्र बदल देना कहीं आरोपी लेखपाल को बचाने का प्रयास तो नहीं है? क्या विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इस बड़े खेल को दबाया जा रहा है?
3. पैसे की रिकवरी पर मौन क्यों? तत्कालीन नायब तहसीलदार राकेश त्रिवेदी ने आश्वस्त किया था कि यदि पैसे लिए गए हैं, तो तत्काल वापस कराए जाएंगे। परंतु आज तक प्रशासन ने पीड़ित परिवार को वह ₹90,000 की राशि वापस क्यों नहीं दिलवाई?
4. पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी दागी: सूत्रों के अनुसार, उक्त लेखपाल पर पहले भी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लग चुके हैं और पहले भी उनके स्थानांतरण हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने विभागीय या कानूनी जांच बैठाने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
पीड़ित परिवार को अब भी न्याय का इंतजार
एक तरफ जहाँ गरीब परिवार ने अपना बेटा खो दिया और गाढ़ी कमाई के ₹90,000 भी गंवा दिए, वहीं दूसरी तरफ आरोपी तंत्र का हिस्सा होने का लाभ उठाकर सुरक्षित है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से एक बार फिर गुहार लगाई है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, रिश्वत की रकम वापस दिलाई जाए और आरोपी लेखपाल के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी (जैसे जिलाधिकारी सीतापुर) इस मामले का संज्ञान लेकर कोई ठोस कदम उठाते हैं, या फिर रसूख के आगे न्याय की यह आवाज दबा दी जाएगी।
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जनपद बस्ती के थाना रूधौली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बढ़या राजा निवासी अभियुक्त जीत
आमोद कुमार
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