जब किसी समाज के महापुरुषों का सम्मान रोका जाता है, जब उनके विचारों को दबाने का प्रयास किया जाता है, जब संविधान की बात करने वालों को अनुमति लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तब यह केवल एक व्यक्ति या संगठन का नहीं बल्कि पूरे समाज के स्वाभिमान का प्रश्न बन जाता है।
आज बहुजन समाज के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि हमारी संख्या कितनी है, बल्कि यह है कि अपने महापुरुषों के सम्मान और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हम कितने जागरूक और संगठित हैं।
डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि 15 जून 2026 को डॉ. अंबेडकर पार्क सिधौली से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास तक निकाली जाने वाली पदयात्रा किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, तथागत गौतम बुद्ध, मान्यवर कांशीराम साहब और बहुजन समाज के सभी महापुरुषों के सम्मान के लिए होगी।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय अनेक नेता बाबा साहेब के नाम पर वोट मांगते हैं, जय भीम के नारे लगाते हैं, संविधान बचाने की बातें करते हैं, लेकिन जब गांवों में बाबा साहेब और बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित करने, बौद्ध कथा कराने और संविधान पर चर्चा करने की बात आती है, तब अधिकांश लोग चुप्पी साध लेते हैं। यह चुप्पी केवल मौन नहीं है, बल्कि समाज के सम्मान के प्रति उदासीनता का प्रतीक है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि ग्राम तेजनापुरवा, अहेवा और लहूरिवन सहित अनेक स्थानों पर बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान में प्रतिमा स्थापना और बौद्ध कार्यक्रम करना चाहता है, लेकिन यदि इसके लिए बार-बार बाधाएं खड़ी की जाएं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त समान अधिकार केवल कागजों तक सीमित हैं?
उन्होंने समाज से पूछा कि यदि हम अपने महापुरुषों का सम्मान नहीं बचा पाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को क्या विरासत देंगे? यदि हम आज भी अन्याय, भेदभाव और उपेक्षा के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएंगे, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज को यह तय करना होगा कि वह केवल सोशल मीडिया पर जय भीम लिखकर संतुष्ट रहेगा या फिर बाबा साहेब के बताए "शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो" के मार्ग पर चलकर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि इतिहास गवाह है कि सम्मान कभी भीख में नहीं मिलता, उसे संघर्ष से प्राप्त करना पड़ता है। जिन महापुरुषों ने हमें संविधान, शिक्षा, मतदान का अधिकार और सम्मानजनक जीवन का मार्ग दिया, उनके सम्मान की रक्षा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
उन्होंने बहुजन समाज की माताओं, बहनों, युवाओं, बुजुर्गों, कर्मचारियों, किसानों, मजदूरों, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि 15 जून 2026 को अपने घरों से निकलें, अपने महापुरुषों के सम्मान के लिए निकलें, अपने बच्चों के भविष्य के लिए निकलें, संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए निकलें।
उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केवल सड़कों पर चलने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बहुजन समाज के स्वाभिमान, आत्मसम्मान और अस्तित्व की आवाज है। आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी कि जब महापुरुषों के सम्मान का प्रश्न उठा था, तब कौन संघर्ष के मैदान में खड़ा था और कौन तमाशा देख रहा था।
आओ, हम सब मिलकर अपने महापुरुषों के सम्मान, संविधान की गरिमा और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए 15 जून को इतिहास रचें।
जय भीम!
जय भारत!
जय संविधान!
जय लोकतंत्र!
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