जनगणना में तेजी लाने को नगर पालिका सक्रिय, कंट्रोल रूम स्थापित कर शुरू हुई सतत निगरानी
आमोद कुमार
स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा: सीमेंट की बोरी से निकल रही गांजे की पुड़ियां, कैमरे में कैद हुआ पूरा खेल?
अब तक न्याय/राकेश त्रिपाठी
जनपद महराजगंज में अवैध नशे का कारोबार अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते हुए संचालित हो रहा है। सदर क्षेत्र के बलुअही धुस चौराहे से लेकर भेड़िया और मिठौरा तक गांजा तस्करों का ऐसा नेटवर्क सक्रिय है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने भयावह हैं कि सुबह से शाम तक खुलेआम “मौत की पुड़िया” बेची जा रही है और जिम्मेदार विभाग या तो अनजान बने हुए हैं या फिर सबकुछ देखकर भी आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्टिंग ऑपरेशन में कैद हुई सच्चाई
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद संवाददाता राकेश त्रिपाठी ने खोजी पत्रकारिता करते हुए मौके पर पहुंचकर स्टिंग ऑपरेशन किया। टीम ने ग्राहक बनकर गांजा खरीदने का प्रयास किया, जहां खुफिया कैमरे में पूरा खेल कैद हो गया।
वीडियो फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह एक युवक सीमेंट की बोरी में छिपाकर रखे गए गांजे की पुड़िया निकालकर ग्राहकों को बेच रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अवैध कारोबार की बाकायदा “रेट लिस्ट” भी तय है।
- 80 रुपये की पुड़िया
- 150 रुपये की पुड़िया
- 250 रुपये की पुड़िया
- 500 रुपये की पुड़िया
यानी युवाओं को नशे की दलदल में धकेलने का यह कारोबार पूरी तरह संगठित तरीके से चलाया जा रहा है।
ट्विटर हैंडल पर दावे, जमीन पर फेल सिंदुरिया पुलिस!
सोशल मीडिया और ट्विटर हैंडल पर अपराध नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे करने वाली सिंदुरिया पुलिस की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। क्षेत्र में खुलेआम चल रहे अवैध गांजा कारोबार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, चिउटहा चौकी क्षेत्र में चल रहे इस अवैध कारोबार से कथित तौर पर “थाने का खर्च” तक निकलने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर जोरों पर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पुलिस वास्तव में कार्रवाई करना चाहती तो पूर्व में प्रकाशित खबरों में जिन संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबर तक सार्वजनिक किए गए थे, उन्हें सर्विलांस पर लेकर आसानी से पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता था। लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा।
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि “तनख्वाह से खुद काम नहीं चलता, तो बाल-बच्चों का क्या होगा” जैसी मानसिकता ने पुलिस व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
आबकारी विभाग की रहस्यमयी चुप्पी?
अवैध गांजा बिक्री की तस्वीरें सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका भी कटघरे में आ गई है। आरोप है कि विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति करता है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
विशेष रूप से आबकारी निरीक्षक सदर गिरीश कुमार की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग सक्रिय होता तो मुख्य चौराहों और गांवों में खुलेआम नशे की बिक्री संभव ही नहीं थी।
महिला पर भी गंभीर आरोप
मोबाइल न.7897688828;
से संपर्क करने के बाद आते हैं लोग?
भेड़िया ग्राम सभा क्षेत्र में नहर के सामने रहने वाली एक महिला शिवकली पर भी गांजा बिक्री के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार उसके यहां भी तय रेट पर गांजे की पुड़ियां आसानी से उपलब्ध हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि अवैध कारोबार को लेकर लोगों का आक्रोश इतना बढ़ गया था कि अतीत में उसके घर को आग के हवाले तक कर दिया गया था। इसके बावजूद यदि दोबारा वही कारोबार सक्रिय हो गया है, तो यह प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
देशी शराब की भी समानांतर कालाबाजारी!
केवल गांजा ही नहीं, बल्कि देउरवा क्षेत्र में भी अवैध रूप से देशी शराब की बिक्री होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सरकारी मूल्य 55 रुपये निर्धारित होने के बावजूद अवैध विक्रेता खुलेआम अधिक दामों पर शराब बेच रहे हैं। इससे आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल दिखाई दे रही है।
युवाओं का भविष्य दांव पर?
गांव और कस्बों के चौराहों पर आसानी से उपलब्ध नशे ने युवा पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। अभिभावकों में भारी चिंता और आक्रोश है। लोगों का सीधा सवाल है कि जब पुलिस और आबकारी विभाग दोनों मौजूद हैं, तो आखिर नशा माफियाओं पर शिकंजा क्यों नहीं कस पा रहा?
पहले भी खबरें छपीं, कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों…
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आमोद कुमार
बांदा।
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