बांदा।


एक ओर प्रशासन गर्मी के मौसम में पेयजल संकट से निपटने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं विकासखंड महुआ के सहेवा गांव में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। गांव के महावीरन मंदिर के पास स्थित सरकारी हैंडपंप पिछले लगभग पंद्रह दिनों से खराब पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों को भीषण गर्मी के बीच पेयजल के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासी बाबू मिश्रा का कहना है कि जिलाधिकारी द्वारा 24 घंटे के भीतर खराब हैंडपंपों की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन पंचायत स्तर पर इन आदेशों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।मामले को लेकर समाजसेवी सुमित शुक्ला ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने उनसे संपर्क कर पेयजल संकट की जानकारी दी थी, जिसके बाद उन्होंने ग्राम प्रधान से वार्ता कर हैंडपंप को शीघ्र ठीक कराने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।सुमित शुक्ला ने बताया कि ग्रामीणों के दोबारा अनुरोध पर उन्होंने मौके पर पहुंचकर ग्राम पंचायत सचिव प्रमोद द्विवेदी से फोन पर बात की और समस्या के त्वरित समाधान की मांग की। सचिव ने हैंडपंप जल्द ठीक कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 6 जून के बाद ग्रामीणों के साथ खराब हैंडपंप के पास अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। भीषण गर्मी में लोगों को पेयजल के लिए परेशान होना प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिचायक है। यदि समस्या का समाधान समय रहते नहीं हुआ तो इसके लिए ग्राम पंचायत प्रशासन जिम्मेदार होगा।इस दौरान अमन शुक्ला, लक्ष्मीकांत शुक्ला, गोलू, बाबू मिश्रा, कुलदीप मिश्रा, पंकज मिश्रा सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे और शीघ्र समाधान की मांग की।गांव में पानी का संकट केवल एक खराब हैंडपंप की कहानी नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर जवाबदेही और व्यवस्था की परीक्षा भी है।

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