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मुंडेरा से रामकथा पार्क तक भक्ति की जीवंत गाथा—हर मोड़ पर गहराती जाएगी ‘जय परशुराम’ की अनकही कहानी
मुंडेरा से रामकथा पार्क तक भक्ति की जीवंत गाथा—हर मोड़ पर गहराती जाएगी ‘जय परशुराम’ की अनकही कहानी
प्रयागराज। कुछ कहानियां लिखी नहीं जातीं…वे खुद- ब- खुद जन्म लेती हैं। गलियों से निकलती हैं, लोगों के दिलों में बसती हैं और फिर इतिहास बन जाती हैं। इस बार अक्षय तृतीया पर कुछ ऐसी ही कहानी संगम नगरी में आकार लेने जा रही है—जहां अखिल भारतीय भगवान परशुराम एकता समिति की पहल पर आस्था, परंपरा और एकता एक साथ सड़कों पर उतरने वाली है। रविवार, उन्नीस अप्रैल दो हजार छब्बीस… दोपहर के ठीक दो बजे। हर-हर महादेव मंदिर, मुंडेरा का वातावरण अचानक बदल उठता है। घंटियों की गूंज, शंखनाद की ध्वनि और “जय परशुराम” के गगनभेदी जयघोष के बीच एक भव्य शोभा यात्रा जन्म लेती है। यह सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि भावनाओं का सैलाब है—जो हर कदम के साथ और गहराता जाता है। मुंडेरा से निकलकर जैसे ही यह यात्रा धर्मवीर मूर्ति की ओर बढ़ती है, ऐसा लगता है मानो इतिहास खुद इसके साथ चल पड़ा हो। बजरंग चौराहे पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, फूलों की वर्षा होती है और हर आंख में एक ही चमक दिखाई देती है—भक्ति की। इमली के पेड़ के नीचे से गुजरती यह यात्रा परंपराओं की छांव लिए आगे बढ़ती है। कंधईपुर लेबर चौराहे पर पहुंचते-पहुंचते यह एक विराट रूप ले लेती है, जहां हर कोई इस कहानी का हिस्सा बनना चाहता है। प्रीतम नगर दुर्गा पूजा पार्क से गुजरते हुए ढोल-नगाड़ों की थाप और भजनों की गूंज इस माहौल को और भी दिव्य बना देती है। चौफटका तक पहुंचते-पहुंचते यह सिर्फ एक यात्रा नहीं रहती—यह जनआस्था का महाकुंभ बन जाती है। लेकिन कहानी यहीं समाप्त नहीं होती… यह आगे बढ़ती है, सुलेम सराय के रास्ते ट्रांसपोर्ट नगर स्थित रामकथा पार्क तक, जहां जलपान के साथ इसका समापन होता है—और लोगों के दिलों में एक नई शुरुआत की छाप छोड़ जाती है। इस जीवंत कहानी में कई प्रभावशाली किरदार भी हैं, जो इसे और भव्य बनाते हैं। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक इंजीनियर उदयभान करवरिया की उपस्थिति इस आयोजन को विशेष आयाम देती है। वहीं फूलपुर के सांसद प्रवीण पटेल, फूलपुर के विधायक, शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन वाजपेई, शहर पश्चिमी के विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह, पूर्व सांसद रीता बहुगुणा जोशी, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश शुक्ला, चायल कौशांबी की विधायक पूजा पाल, पूर्व विधायक प्रभात शंकर पांडे, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री लालमणि तिवारी, अनीता त्रिपाठी और जयपाल सहित अनेक प्रमुख हस्तियां इस आयोजन की गरिमा बढ़ाएंगी। और इस पूरी कथा के असली सूत्रधार—अखिल भारतीय भगवान परशुराम एकता समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित ओम प्रकाश गौतम, राष्ट्रीय महामंत्री पंडित नरेंद्र कुमार द्विवेदी एवं समस्त पदाधिकारीगण—जो इसे केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था का उत्सव बनाने में दिन-रात जुटे हैं। इस भव्य आयोजन की झलक और इसकी गहराई को शब्दों में पिरोने का कार्य प्रथम मंच के संवाददाता एवं समिति के जिला मीडिया प्रभारी विजय शुक्ला ने किया है, जिनकी लिखी यह स्क्रिप्ट खुद बयां करती है कि यह आयोजन केवल खबर नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है। जैसे-जैसे उन्नीस अप्रैल नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे यह कहानी और गहराती जा रही है। प्रयागराज इस दिन सिर्फ एक शहर नहीं रहेगा—वह एक मंच होगा, जहां आस्था अभिनय करेगी, परंपरा संवाद बोलेगी और हर श्रद्धालु इस कहानी का हिस्सा बन जाएगा। यह सिर्फ एक शोभा यात्रा नहीं… यह वह कहानी है, जिसे हर कोई देखना, सुनना और अपने दिल में सहेज कर रखना चाहेगा।
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