“सांसों का सौदा नहीं होगा” – भारतीय किसान यूनियन का ऐलान, प्रदूषण पर चुप्पी टूटी तो होगा बड़ा आंदोलन


बारा,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर अब खुली लड़ाई की शुरुआत हो गई है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) द्वारा उपजिलाधिकारी बारा को सौंपे गए ज्ञापन ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। ज्ञापन में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि शंकरगढ़ ब्लॉक में संचालित फैक्ट्रियों और लोहगरा स्थित एनटीपीसी परियोजना के कारण दर्जनों गांव खतरनाक प्रदूषण की चपेट में आ चुके हैं।यूनियन का कहना है कि क्षेत्र की हवा में घुल रही राख, धूल और धुआं अब सामान्य नहीं, बल्कि “धीमा जहर” बन चुका है। खासतौर पर लोहगरा एनटीपीसी इकाई के आसपास बसे गांवों में उड़ती राख और प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी है। आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला उत्सर्जन पर्यावरणीय मानकों की सख्त निगरानी के बिना वातावरण में छोड़ा जा रहा है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां, अस्थमा, फेफड़ों में संक्रमण, आंखों में जलन और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। गांवों के बुजुर्ग और मासूम बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह की हवा में ताजगी की जगह धूल की परत महसूस होती है और शाम ढलते ही वातावरण में धुंधलापन छा जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि आखिर इन इकाइयों को प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र किस आधार पर दिया जा रहा है? क्या नियमित जांच हो रही है? क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी? यूनियन ने मांग की है कि जब तक ठोस पर्यावरणीय जांच नहीं होती और पारदर्शी रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक किसी भी फैक्ट्री या परियोजना को संचालन की खुली छूट न दी जाए। दीपक तिवारी ने दो टूक कहा कि “जनता की सांसों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाया तो सड़क से लेकर तहसील तक बड़ा आंदोलन होगा।” ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और जिलाधिकारी को भी भेजी गई है, जिससे मामला अब उच्च स्तर तक पहुंच गया है। अब निगाहें प्रशासन पर टिक गई हैं।क्या शंकरगढ़ और लोहगरा की हवा को साफ करने के लिए ठोस कार्रवाई होगी? या फिर उद्योगों की चिमनियों से उठता धुआं यूं ही ग्रामीणों के भविष्य को ढकता रहेगा? यह सिर्फ प्रदूषण का मामला नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य का सवाल

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