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बेरोजगार युवाओं और प्रभावित किसानों के अधिकारों की लड़ाई को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। डॉ आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ)
कमलापुर (सीतापुर)। बेरोजगार युवाओं और प्रभावित किसानों के अधिकारों की लड़ाई को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। डॉ आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा राष्ट्रीय किसान यूनियन (सिद्धार्थ) के संस्थापक अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कमलापुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में साफ शब्दों में कहा कि यदि स्थानीय उद्योगों द्वारा क्षेत्रीय युवाओं और पूर्व कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं किया गया तो निर्णायक संघर्ष छेड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या संगठन की नहीं बल्कि क्षेत्र के सम्मान, रोजगार और अधिकारों की लड़ाई है, जिसे हर हाल में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में मैग्ना फैक्ट्री में पूर्व में कार्यरत कर्मचारियों और क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के साथ विस्तृत चर्चा की गई। राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि फैक्ट्री में पहले काम कर चुके कर्मचारियों को नौकरी से हटाकर बाहर करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मैग्ना फैक्ट्री प्रबंधन शीघ्र पूर्व कर्मचारियों को पुनः नौकरी पर बहाल नहीं करता तो वे जिला अधिकारी से मिलकर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन और उद्योग प्रबंधन को यह समझ लेना चाहिए कि अब क्षेत्र का युवा और किसान अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने आगे कहा कि यदि क्षेत्र में प्रस्तावित शुगर फैक्ट्री चालू होती है और उसमें भी पूर्व कर्मचारियों तथा प्रभावित परिवारों की अनदेखी की जाती है तो व्यापक आंदोलन होगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिन किसानों की जमीन मैग्ना फैक्ट्री द्वारा अधिग्रहित की गई है, उन किसानों या उनके परिजनों को योग्यता के अनुसार रोजगार दिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो फैक्ट्री का चक्का जाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जमीन देने वाले किसानों के परिवारों को रोजगार देना केवल नैतिक दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल है।
सिद्धार्थ ने कहा कि क्षेत्र में लगातार यह शिकायत मिल रही है कि स्थानीय उद्योगों में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि क्षेत्रीय युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अस्वीकार्य है और अब इसे बदलने के लिए संगठित संघर्ष जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि उद्योग यदि स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं तो उन्हें स्थानीय युवाओं को रोजगार देना ही होगा। उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि उद्योगों के साथ हुए समझौतों की समीक्षा की जाए और रोजगार से संबंधित शर्तों को सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर आगामी 28 फरवरी 2026 को मास्टरबाग में एक विशाल युवा किसान पंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इस पंचायत में मैग्ना फैक्ट्री के पूर्व कर्मचारी, जमीन देने वाले किसान परिवार, बेरोजगार युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल होंगे। पंचायत का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं बल्कि रोजगार के लिए ठोस रणनीति बनाना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायत में आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने रेडिको खेतान कंपनी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि रेडिको खेतान और अन्य उद्योग क्षेत्रीय युवाओं की अनदेखी करते रहे तो एक व्यापक जनांदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन पूरी ताकत के साथ होगा, जिसमें किसान, मजदूर और युवा एकजुट होकर अपने अधिकारों की मांग करेंगे।
बैठक में उपस्थित कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने भी अपनी बात रखी और कहा कि लंबे समय से पूर्व कर्मचारियों को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कई लोग वर्षों तक फैक्ट्री में काम करते रहे, लेकिन अचानक उन्हें बाहर कर दिया गया। इससे उनके परिवारों की आजीविका पर संकट आ गया है। उन्होंने राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में संघर्ष को तेज करने का समर्थन किया और कहा कि अब संगठित होकर ही न्याय मिल सकता है।
प्रदेश उपाध्यक्ष वंशराज भारती ने अपने संबोधन में कहा कि आज किसान और युवा दोनों ही मजबूरी की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ किसान अपनी जमीन देकर उद्योगों को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी तरफ उसका परिवार बेरोजगारी की मार झेलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उद्योगों ने शीघ्र क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार देना शुरू नहीं किया तो किसी भी समय बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि उद्योगों को स्थानीय रोजगार के लिए बाध्य करे और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाए।
बैठक में अरुण तिवारी ने कहा कि रोजगार का मुद्दा अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान का प्रश्न बन चुका है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का युवा पढ़-लिखकर भी नौकरी के लिए भटक रहा है, जबकि उद्योग उसके सामने खड़े हैं। कमलेश कुमार ने कहा कि स्थानीय युवाओं की अनदेखी बंद होनी चाहिए और उद्योगों को पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनानी चाहिए। आशीष मिश्रा ने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का विस्तार जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक किया जाएगा।
अम्बर लाल ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों की जमीन पर खड़े उद्योगों का पहला दायित्व स्थानीय परिवारों का पुनर्वास और रोजगार है। सौरभ शुक्ला ने कहा कि पंचायत को ऐतिहासिक बनाने के लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। आशीष अवस्थी ने युवाओं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकार मांगने से नहीं, संघर्ष से मिलते हैं। विनय शुक्ला ने कहा कि यह लड़ाई किसी संगठन की नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।
पुट्ठीलाल ने कहा कि वर्षों से क्षेत्र के लोगों ने उद्योगों को सहयोग दिया, लेकिन बदले में बेरोजगारी मिली। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि उद्योग भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। जगदीश ने कहा कि मास्टरबाग की पंचायत में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और रोजगार के सवाल पर निर्णायक आवाज उठेगी। सुरेश ने कहा कि पंचायत के बाद आंदोलन की दिशा स्पष्ट होगी और यदि जरूरत पड़ी तो धरना, प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
बैठक के अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन परिणाम जरूर देगा। उन्होंने युवाओं और किसानों से अपील की कि वे 28 फरवरी को मास्टरबाग पहुंचकर अपनी एकता का परिचय दें। उन्होंने कहा कि जब तक पूर्व कर्मचारियों को नौकरी नहीं मिलती, जमीन देने वाले किसानों के परिवारों को रोजगार नहीं मिलता और क्षेत्रीय युवाओं को उद्योगों में प्राथमिकता नहीं मिलती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संविधान सम्मत तरीके से चलाया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से संवाद के लिए दरवाजे खुले रखने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि न्याय नहीं मिला तो संघर्ष तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मास्टरबाग की पंचायत क्षेत्र के इतिहास में एक नई दिशा तय करेगी और यह रोजगार के अधिकार की निर्णायक लड़ाई का आगाज साबित होगी।
बैठक में बड़ी संख्या में कर्मचारी, किसान, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में 28 फरवरी को मास्टरबाग में आयोजित होने वाली युवा किसान पंचायत को सफल बनाने का संकल्प लिया और रोजगार के सवाल पर एकजुट होकर संघर्ष करने का भरोसा दिलाया।
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