बाँदा। ग्राम पंचायत रानीपुर ब्लॉक बिसंडा के मजरा राहा की नालियाँ इन दिनों जैसे मौन हो गई हों—जड़, जाम और जद्दोजहद में घिरी हुई। जहाँ कभी स्वच्छ जलधारा बहती थी, वहाँ अब ठहरा हुआ गंदा पानी अपने अस्तित्व का दंश दे रहा है। परिणामस्वरूप गाँव की पगडंडी पर कीचड़ ने ऐसा साम्राज्य खड़ा कर लिया है, मानो रास्ता नहीं, कोई दलदली कुआँ हो जिसमें हर कदम डूबने को तैयार मिलता है।
ग्रामीण अरविंद यादव का प्रार्थना पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि उस पीड़ा का प्रमाण है जो गाँव के हर घर तक फैल चुकी है। उनका कहना है कि नाली की महीनों से अनदेखी ने रोजमर्रा के जीवन को संकट में डाल दिया है—जहाँ रास्ता चलने के लिए होता है, वहाँ अब फिसलन ने डेरा डाल दिया है।जहाँ बच्चे खेलते थे, वहाँ अब गंदगी अपनी दुर्गंध का पाठ पढ़ा रही है।जहाँ बुजुर्ग धीमे कदमों से गुजरते थे, वहाँ अब हर कदम भय का सबक बन गया है। सफाई एक व्यवस्था नहीं, बल्कि जनजीवन की रीढ़ होती है।
यह वह काम है, जिसे टालना नहीं, निभाना पड़ता है।
परंतु सफाईकर्मी की अनुपस्थिति ने इस व्यवस्था को चरमराकर रख दिया है।
ग्रामवासियों का यह कहना व्यर्थ नहीं कि यदि जल्द सफाई न कराई गई, तो यह कीचड़ केवल पैरों को नहीं रोकेगा, बल्कि बीमारी का दरवाजा भी खटखटाएगा। ग्रामीणों की चिंता में तर्क है, विवेक है और अनुभव का सत्य भी—गंदगी जितनी देर रहेगी, उतना ही जीवन पर ग्रहण डालेगी।इसीलिए ग्रामीणों ने प्रशासन से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि नाली की सफाई तत्काल कराई जाए, ताकि रानीपुर की राहों पर फिर से चलने की सहजता लौट सके, बच्चों की हँसी वापस गूँज सके और गाँव की हवा में स्वच्छता की साँस बह सके।
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