श्रीकृष्ण भास्कर अब तक न्याय न्यूज आपको अवगत कराते चलें कि भारत का सच्चा नेता वही है,


जो वैभव के शिखर पर रहकर भी गरीबों के बीच रहना जानता हो। 
अमीर होना दोष नहीं, पर अमीरी में रहकर जन-मन की पीड़ा भूल जाना राष्ट्रप्रेम से अलग होना है।
जनता ने नेतृत्व इसलिए सौंपा,
कि कोई अपने स्वार्थ का सिंहासन न बनाए।
बल्कि जनसेवा का दीप जलाए।
नेता का पद राजसुख का मार्ग नहीं, बल्कि जनकल्याण की तपस्या है।
आज आवश्यकता है ऐसे नेतृत्व की, जो वचन और कर्म में एकसमान हो, जिसकी वाणी में सत्य और आचरण में त्याग हो।
जो जनता के बीच रहकर
जनता की धड़कनों का दुःख दर्द समझ सकें।
देशभक्ति का अर्थ केवल नारे लगना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित को स्वयं के निजीहित से ऊपर रखना है।
सच्चा देशभक्त वही, जो प्रत्येक जीव के आँसू को अपना मानकर प्रत्येक जीव व नागरिक की आशा का सहयोगी बने।
“सत्यमेव जयते” की गाथा तभी जिंदा होगी, जब सत्ता जनसेवा बनेगी, और नेतृत्व जनविश्वास का प्रतीक।
भारतीय जनता की ये ही पुकार,
शिक्षा चिकित्सा हो एक समान।

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