बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले विद्यार्थियों के हित में एक बड़ा और मानवीय निर्णय लेते हुए


जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी छात्र-छात्रा को फीस जमा न होने के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।

18 फरवरी से शुरू हो रही उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के मद्देनज़र जिला प्रशासन ने यह अहम आदेश जारी किया है। डीएम ने सभी प्रधानाचार्यों और केंद्र व्यवस्थापकों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यार्थी को फीस के अभाव में रोका गया या प्रवेश पत्र देने में लापरवाही बरती गई, तो संबंधित के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सभी परीक्षार्थियों को समय से प्रवेश पत्र उपलब्ध कराना संबंधित प्रधानाचार्य और केंद्र व्यवस्थापक की पूर्ण जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह निर्णय उन परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण समय पर फीस जमा नहीं कर पाते। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि आर्थिक स्थिति किसी भी छात्र के भविष्य की राह में रुकावट नहीं बनेगी। फीस के नाम पर परीक्षा से वंचित करना पूर्णतः प्रतिबंधित माना जाएगा। यदि किसी छात्र-छात्रा की शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित विद्यालय प्रशासन पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

डीएम का यह फैसला शिक्षा के प्रति प्रशासन की संवेदनशील सोच और समान अवसर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह निर्णय न केवल छात्रों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को मानवीय और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।अब साफ है — “परीक्षा का अधिकार सबको, बिना किसी भेदभाव के।”
 

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