पीलीभीत जिले के खमरिया पुल स्थित परम अक्रिय धाम अलखेश्वर महादेव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वार्षिकोत्सव ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय आलोक से


पीलीभीत जिले के खमरिया पुल स्थित परम अक्रिय धाम अलखेश्वर महादेव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वार्षिकोत्सव ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय आलोक से भर दिया। भव्य सजावट, वेद मंत्रों की अनुगूंज, “हर-हर महादेव” के जयघोष और संतों की दिव्य वाणी ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण रचा कि हजारों श्रद्धालु भावसमाधि में डूबे नजर आए।

देश के विभिन्न राज्यों—हरिद्वार, ऋषिकेश, राजस्थान, हरियाणा, बागपत सहित कई प्रांतों—से पधारे महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर और श्री महंतों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। संत सम्मेलन में सनातन धर्म, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र चेतना पर ओजस्वी विचार रखे गए। संतों ने कहा कि धर्म ही समाज को दिशा देता है और संस्कृति ही राष्ट्र की आत्मा है।

मंदिर के पीठाधीश्वर और बरखेड़ा विधायक महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद के सान्निध्य में हुए इस आयोजन में बरखेड़ा विधानसभा सहित पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर, हाथरस, बाराबंकी और अन्य जिलों से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। संतों के आशीर्वचन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत प्रवाह महसूस किया गया।

आयोजन के दौरान देशभर से पधारे संतों का शॉल, स्मृति चिन्ह और सम्मान के साथ अभिनंदन किया गया। संतों ने अपने संबोधन में कहा कि अलखेश्वर धाम आने वाले समय में पीलीभीत की आध्यात्मिक पहचान का केंद्र बनेगा और समाज को संस्कार, सेवा व सद्भाव की राह पर अग्रसर करेगा।

समारोह के उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर में दर्शन-पूजन और आरती के समय भक्तों की आस्था अपने चरम पर दिखाई दी। दीपों की ज्योति और भक्ति की तरंगों ने पूरे धाम को दिव्यता से आलोकित कर दिया।

यह वार्षिकोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पीलीभीत की धार्मिक चेतना, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का भव्य प्रतीक बनकर सामने आया—जिसने अलखेश्वर महादेव धाम को नई ऊंचाइयों पर प्रतिष्ठित कर दिया।

राजकुमार वर्मा 
अबतक न्याय पीलीभीत

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