पीलीभीत। देश-दुनिया में बाघों की मौजूदगी और समृद्ध जैव विविधता के लिए पहचाना जाने वाला पीलीभीत टाइगर रिजर्व इन दिनों वित्तीय संकट की मार झेल रहा है।


 केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 5.72 करोड़ रुपये के बजट में से अब तक केवल 90 लाख रुपये ही जारी हो पाए हैं। बाकी धनराशि नई वित्तीय प्रणाली की जटिल प्रक्रियाओं में अटकी है।

नई व्यवस्था के तहत डीएफओ स्तर से बिल अपलोड होने के बाद फाइल को पीसीसीएफ, वित्त नियंत्रक, साइबर ट्रेजरी और पीएफएमएस की रीयल-टाइम ट्रैकिंग जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई यह प्रणाली फिलहाल भुगतान में देरी का कारण बन रही है।

धनाभाव के कारण ग्राउंड स्टाफ के वेतन भुगतान, कैंपों में तैनात हाथियों के चारे की व्यवस्था, ग्रासलैंड विकास, वॉटर मैनेजमेंट और आगामी फायर सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बजट जारी नहीं हुआ तो जंगल की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि फायर सीजन से पहले तैयारियों में देरी जंगल और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ा तो शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण भी चुनौती बन सकता है।

डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि वित्तीय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बदलाव किए गए हैं। नई वित्तीय प्रक्रिया अपनाने में समय लगा,लेकिन बजट रिलीज में हो रही देरी से कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही शेष धनराशि जारी होगी।

बाघों की दहाड़ और हरियाली की पहचान बना यह टाइगर रिजर्व आज इंतजार में है।बजट की रफ्तार बढ़े, ताकि जंगल की सुरक्षा और संरक्षण कार्य फिर पूरी ताकत से आगे बढ़ सकें।

राजकुमार वर्मा
अबतक न्याय पीलीभीत

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