दिल के दरिया को किसी रोज़ उतर जाना है


दिल के दरिया को किसी रोज़ उतर जाना है
इतना बे-सम्त न चल लौट के घर जाना है

उस तक आती है तो हर चीज़ ठहर जाती है
जैसे पाना ही उसे अस्ल में मर जाना है

बोल ऐ शाम-ए-सफ़र रंग-ए-रिहाई क्या है
दिल को रुकना है कि तारों को ठहर जाना है

कौन उभरते हुए महताब का रस्ता रोके
उस को हर तौर सू-ए-दश्त-ए-सहर जाना है

मैं खिला हूँ तो उसी ख़ाक में मिलना है मुझे
वो तो ख़ुश्बू है उसे अगले नगर जाना है

वो तिरे हुस्न का जादू हो कि मेरा ग़म-ए-दिल
हर मुसाफ़िर को किसी घाट उतर जाना है
 

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Rajesh Kumar Siddharth

अब तक इंडिया लाइव न्यूज़ चैनल

राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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