क़दम क़दम बढ़ाए जा ख़ुशी के गीत गाए जा;
ये ज़िंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाए जा।
व्याकुल वसुंधरा की काया
नव-निर्माण नयन में छाया।
कण-कण सिहर उठे
अणु-अणु ने सहस्राक्ष अंबर को ताका
शेषनाग फूत्कार उठे
सांसों से निःसृत अग्नि-शलाका।
धुआंधार नभी का वक्षस्थल
उठे बवंडर, आंधी आई,
पदमर्दिता रेणु अकुलाकर
छाती पर, मस्तक पर छाई।
हिले चरण, मतिहरण
आततायी का अंतर थर-थर काँपा
भूसुत जगे तीन डग में ।
बामन ने तीन लोक फिर नापा।
धरा गर्विता हुई सिंधु की छाती डोल उठी है।
आज देश की मिट्टी बोल उठी है।
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ये ज़िंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाए जा।
समय है, मुस्कुराए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा।
गणतंत्र दिवस आ चुका है और इस मौके पर स्कूल-कॉलेज समेत कई संस्थानों में प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहांं हम आपके लिए ऐसी 10 कविताएं लेकर आए हैं जिनका इस्तेमाल आप गणतंत्र दिवस समारोह में सुनाने के लिए बेझिझक कर सकते हैं।
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