क़दम क़दम बढ़ाए जा ख़ुशी के गीत गाए जा; ये ज़िंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाए जा। उड़ी तमिस्र रात है, जगा नया प्रभात है, चली नई जमात है, मानो कोई बरात है,
समय है, मुस्कुराए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा।
ये ज़िंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाए जा।
उड़ी तमिस्र रात है, जगा नया प्रभात है,
चली नई जमात है, मानो कोई बरात है,
समय है, मुस्कुराए जा,
ख़ुशी के गीत गाए जा।
ये ज़िंदगी है क़ौम की
तू क़ौम पे लुटाए जा।
जो आ पड़े कोई विपत्ति मार के भगाएंगे,
जो आए मौत सामने तो दांत तोड़ लाएंगे,
बहार की बहार में
बहार ही लुटाए जा।
क़दम क़दम बढ़ाए जा,
ख़ुशी के गीत गाए जा।
जहाँ तलक न लक्ष्य पूर्ण हो समर करेंगे हम,
खड़ा हो शत्रु सामने तो शीश पै चढ़ेंगे हम,
विजय हमारे हाथ है
विजय-ध्वजा उड़ाए जा।
क़दम क़दम बढ़ाए जा,
ख़ुशी के गीत गाए जा।
ये जिंदगी है कौम की
तू कौम पे लुटाए जा।
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समय है, मुस्कुराए जा, ख़ुशी के गीत गाए जा।
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26 January par Desh Bhakti Hindi Kavita: हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। यह दिन संविधान लागू होने, नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी और अधिकारों की याद दिलाने के लिए होता है। इस दिन पूरे देश में कार्यक्रमों का आयोजन होता है। गणतंत्र दिवस पर अगर आप कविताएं पढ़ना चाहते हैं तो यहां द
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