26th January Poems in Hindi: गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को हर साल मनाया जाता है। इस दिन हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। यहां हम आपके लिए रिपब्लिक डे की 10 शानदार कविताएं लाए हैं जिन्हें सुनाकर आप हर किसी के दिल को जीत सकते हैं। यह कविताएं देश भक्ति भावना भरी हैं और इनमें से कईयों को आपने अपने स्कूलों की किताब में भी पढ़ा होगा। आइए यहां
गणतंत्र दिवस पर कविता

माखन लाल चतुर्वेदी- पुष्प की अभिलाषा
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं॥
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊं।
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूं, भाग्य पर इठलाऊं॥
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ में देना तुम फेंक॥
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने।
जिस पथ जावें वीर अनेक॥ से पहले एक नजर डालते हैं कुछ मशहूर लेखक और कवियों की देशभक्ति कविताओं पर जो जिन्हें पढ़ने के बाद हर कोई गर्व का अनुभव करेगा।
सुभद्रा कुमारी चौहान - वीरों का कैसा हो वसंत?

वीरों का कैसा हो वसंत?
आ रही हिमाचल से पुकार,
है उदधि गरजता बार-बार,
प्राची, पश्चिम, भू, नभ अपार,
सब पूछ रहे हैं दिग्-दिगंत,
वीरों का कैसा हो वसंत?
फूली सरसों ने दिया रंग,
मधु लेकर आ पहुंचा अनंग,
वधु-वसुधा पुलकित अंग-अंग,
हैं वीर वेश में किंतु कंत,
वीरों का कैसा हो वसंत?
भर रही कोकिला इधर तान,
मारू बाजे पर उधर गान,
है रंग और रण का विधान,
मिलने आये हैं आदि-अंत,
वीरों का कैसा हो वसंत?
गलबांहें हों, या हो कृपाण,
चल-चितवन हो, या धनुष-बाण,
हो रस-विलास या दलित-त्राण,
अब यही समस्या है दुरंत,
वीरों का कैसा हो वसंत?
कह दे अतीत अब मौन त्याग,
लंके, तुझमें क्यों लगी आग?
ऐ कुरुक्षेत्र! अब जाग, जाग,
बतला अपने अनुभव अनंत,
वीरों का कैसा हो वसंत?
हल्दी-घाटी के शिला-खंड,
ऐ दुर्ग! सिंह-गढ़ के प्रचंड,
राणा-ताना का कर घमंड,
दो जगा आज स्मृतियाँ ज्वलंत,
वीरों का कैसा हो वसंत?
भूषण अथवा कवि चंद नहीं,
बिजली भर दे वह छंद नहीं,
है कलम बंधी, स्वच्छंद नहीं,
फिर हमें बतावे कौन? हंत!
वीरों का कैसा हो वसंत?
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