गोरखपुर के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) 2026 द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन हेतु बनाए गए विनियमन पर गंभीर आपत्ति जताई


गोरखपुर के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) 2026 द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन हेतु बनाए गए विनियमन पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस नियम से समाज में जातिगत संघर्ष बढ़ने की आशंका है, जिससे सामाजिक समरसता खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने जोर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव समाप्त होना चाहिए, लेकिन यह नियम सामान्य वर्ग के उत्पीड़न का हथियार बन सकता है।देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी को नियम बनाते समय सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ न्याय की आवश्यकता पर बल दिया, लेकिन साथ ही सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा की भी मांग की। उनका मानना है कि भारतीय न्याय प्रणाली में पहले से ही ऐसे प्रावधान मौजूद हैं, जो उत्पीड़न रोकने में सक्षम हैं, इसलिए अतिरिक्त समिति गठित करना अनावश्यक है।
उच्च शिक्षा को उत्कृष्ट बनाने के लिए उन्होंने कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को केंद्र बिंदु बनाना होगा और शोध में निवेश बढ़ाना होगा। बेहतर रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और शोध परिसर विकसित करने की आवश्यकता है। साथ ही, भारत को वैश्विक प्रतिभाओं को वापस लाने के लिए रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहिए।
देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि उद्योगों के साथ मिलकर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर आधारित शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए। पेटेंट, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि यूजीसी का उद्देश्य ज्ञान, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना होना चाहिए ताकि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण हो सके।उन्होंने इस विनियमन को तत्काल निरस्त करने और एक संतुलित समिति गठित करने की मांग की है, ताकि सभी वर्गों के छात्रों के साथ न्याय हो सके और उच्च शिक्षा संस्थानों को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

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