गोरखपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, गीडा पॉलिटेक्निक के प्रथम वर्ष के छात्र अजित यादव एवं रूची त्रिपाठी ने कॉलेज की इनोवेशन टीम के सहयोग से भारतीय


गोरखपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, गीडा पॉलिटेक्निक के प्रथम वर्ष के छात्र अजित यादव एवं रूची त्रिपाठी ने कॉलेज की इनोवेशन टीम के सहयोग से भारतीय सेना के जवानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट डिफेंस हैंड ग्लव्स का निर्माण किया है। यह अत्याधुनिक दस्ताना न केवल कड़ाके की ठंड से जवानों को सुरक्षित रखेगा, बल्कि मेडिकल आपात स्थिति में भी उनकी सहायता करेगा। विशेष बात यह है कि इस हाई-टेक दस्ताने की मदद से जवान फायरिंग भी कर सकेंगे।

यह स्मार्ट ग्लव्स ठंड से सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ युद्ध के दौरान किसी जवान के घायल होने की स्थिति में तुरंत अलार्म के माध्यम से कंट्रोल रूम तक सूचना पहुंचाता है। सूचना के साथ घायल जवान की पहचान भी कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है, जिससे समय रहते आवश्यक सहायता और उपचार उपलब्ध कराकर जवान की जान बचाई जा सकती है।

छात्रा रूची त्रिपाठी ने बताया कि यह दस्ताना विशेष रूप से भारतीय सेना के जवानों के लिए तैयार किया गया है, जो इंटरनेट, रेडियो एवं वायरलेस तकनीक से लैस है। देखने में यह एक सामान्य दस्ताने जैसा प्रतीत होता है, लेकिन युद्ध के दौरान इस दस्ताने की सहायता से जवान दुश्मनों पर फायरिंग भी कर सकते हैं। साथ ही, यदि कोई जवान घायल हो जाता है तो यह दस्ताना मेडिकल कंट्रोल रूम तक तुरंत सूचना पहुंचाने में सक्षम है।

आर्मी मेडिकल एसओएस ग्लव्स में दो बटन लगाए गए हैं, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आधारित ट्रांसमीटर-रिसीवर प्रणाली पर कार्य करते हैं। ट्रांसमीटर ग्लव्स में लगाया गया है, जबकि रिसीवर आर्मी कंट्रोल रूम एवं गन के ट्रिगर में स्थापित किया जाता है। ग्लव्स में लगा पहला बटन मैन्युअल रूप से कार्य करता है, जिसके माध्यम से जवान आपात स्थिति में स्वयं कंट्रोल रूम को सूचना भेज सकते हैं। वहीं दूसरा बटन सेंसर आधारित है, जो जवान के घायल होकर जमीन पर गिरते ही स्वतः सक्रिय हो जाता है और कंट्रोल रूम में अलार्म के माध्यम से सूचना भेज देता है। इसके बाद कंट्रोल रूम घायल जवान को ट्रैक कर उचित उपचार की व्यवस्था कर सकता है।

इस दस्ताने से गन को संचालित करने की प्रभावी रेंज वर्तमान में लगभग एक से तीन किलोमीटर तक है। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग दो सप्ताह का समय लगा है। छात्रा रूची त्रिपाठी ने बताया कि इस डिफेंस दस्ताने को बनाने में लगभग पैंतीस से चालीस हजार रुपये का खर्च आया है। इसमें दस्ताने, धातु, स्टील पाइप, रेडियो सर्किट, स्विच, अलार्म, अल्ट्रासोनिक सेंसर, अरडुइनो, हीटिंग प्लेट तथा तीन दशमलव पाँच वोल्ट की बैटरी आदि का उपयोग किया गया है।

संस्थान के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने बताया कि छात्रों ने इस प्रोजेक्ट का प्रोटोटाइप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के इनोवेशन सेल में तैयार किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के नवाचार और रचनात्मक सोच से आने वाले भारत की सशक्त तस्वीर दिखाई देती है। तकनीक के माध्यम से देश के जवानों की सुरक्षा को मजबूत करने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।

इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष श्री नीरज मातनहेलिया, सचिव श्री श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष श्री निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव श्री अनुज अग्रवाल सहित संस्थान के सभी शिक्षकों ने छात्रों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे संस्थान के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण बताया।

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