*भ्रष्टाचार के आरोपों में एआरटीओ पुष्पांजलि मिश्रा निलंबित, खनिज अधिकारी देशराज पटेल पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं*
– यूपी एसटीएफ की छापेमारी और एफआईआर के बाद परिवहन विभाग में बड़ी कार्रवाई
– ओवरलोड ट्रकों से करोड़ों की अवैध वसूली के रैकेट का पर्दाफाश
– रायबरेली के एआरटीओ अंबुज भी सस्पेंड, फतेहपुर का प्रभार प्रयागराज के अधिकारी को
– खनिज अधिकारी देशराज पटेल के संरक्षण में जारी अवैध खनन पर सवाल बरकरार
फतेहपुर ब्यूरो
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में लंबे समय से चल रहे ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली और अवैध खनन के बड़े रैकेट में आखिरकार परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ प्रवर्तन) पुष्पांजलि मिश्रा को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसी मामले में रायबरेली के एआरटीओ (प्रवर्तन) अंबुज को भी सस्पेंड किया गया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की नवंबर 2025 में की गई छापेमारी और एफआईआर के बाद हुई है।गौरतलब है कि 12 नवंबर 2025 को यूपी एसटीएफ ने फतेहपुर, रायबरेली, उन्नाव और लखनऊ समेत कई जिलों में एक साथ छापेमारी की थी। जांच में सामने आया कि परिवहन और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ओवरलोड मोरंग और गिट्टी लदे ट्रकों को बिना चेकिंग पास कराया जाता था। इसके बदले प्रति ट्रक 5 से 10 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जाती थी, जो करोड़ों रुपये में पहुंचती थी। इस रैकेट में दलालों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जो व्हाट्सएप ग्रुप और लोकेशन शेयरिंग के जरिए ट्रकों को सेफ पासेज मुहैया कराते थे। एसटीएफ ने इस मामले में फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा, पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी, खनिज अधिकारी देशराज पटेल, उनके गनर और कई दलालों समेत 20 से अधिक लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। कुछ दलालों को गिरफ्तार भी किया गया, जिन्होंने पूछताछ में अधिकारियों की संलिप्तता कबूली। इसके बावजूद लंबे समय तक बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। चर्चा थी कि हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद पुष्पांजलि मिश्रा अपने पद पर बनी रहीं, जिससे शासन को किरकिरी झेलनी पड़ी। अंततः 1 जनवरी 2026 को परिवहन विभाग ने आदेश जारी कर पुष्पांजलि मित्रा को निलंबित कर दिया। फतेहपुर एआरटीओ का अतिरिक्त प्रभार प्रयागराज के एआरटीओ प्रवर्तन राजीव कुमार को सौंपा गया है। इसी क्रम में रायबरेली के अंबुज को भी सस्पेंड किया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई शासन के दबाव और लगातार मीडिया कवरेज के बाद हुई। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल खनिज अधिकारी देशराज पटेल पर कार्रवाई न होने को लेकर उठ रहा है। एफआईआर में उनका नाम प्रमुखता से शामिल है और आरोप है कि उनके संरक्षण में ही अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन फल-फूल रहा था। दलालों ने कबूला कि वसूली की रकम का हिस्सा खनिज विभाग के अधिकारियों तक भी पहुंचता था। फिर भी, अब तक देशराज पटेल पर निलंबन जैसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल उठ रहे हैं और जिले में अवैध मोरंग-मिट्टी खनन जारी होने की शिकायतें मिल रही हैं।इस बीच, प्रशासन ने अवैध खनन पर कुछ कार्रवाइयां की हैं। कोर्रा कनक खदान (खंड-2) में यमुना जलधारा में प्रतिबंधित मशीनों से खनन पर 5.5 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। संगोलीपुर मड़ैयन खदान में पट्टा क्षेत्र से बाहर 517.5 घनमीटर अवैध खनन पर 7.65 लाख रुपये का जुर्माना और पांच ओवरलोड ट्रक सीज किए गए। लेकिन जानकारों का मानना है कि ये कार्रवाइयां दिखावटी हैं और बड़े अधिकारी बच रहे हैं।एसटीएफ की जांच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियां व निलंबन हो सकते हैं। यह मामला परिवहन व खनिज विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर कर रहा है। जिले के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, ताकि अवैध खनन और वसूली का यह सिंडिकेट पूरी तरह ध्वस्त हो सके।
रिपोर्ट: लव सिंह यादव,ब्यूरो चीफ़,फतेहपुर, अब तक न्याय
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