राजकुमार वर्मा


 

जन्म लेते ही अपनी मां से बिछड़ा 18 दिन का हाथी का बच्चे को पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नया आशियाना मिल गया है। शनिवार को वनविभाग के अधिकारियों ने नन्हे करभ का स्वागत किया। आपको बता दें कि 2 दिसंबर को बिजनौर की बढ़ावपुर वन रेंज में जन्मा यह हाथी का बच्चा अपनी मां से बिछड़ गया था। शासन के निर्देश पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने हाथी के बच्चे को लाने की तैयारियां शुरू कर दी थीं। बढ़ावपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी रमेश सिंह और अन्य वनकर्मियों ने बच्चे को भावुक विदाई दी। वनकर्मियों ने बच्चे को फूल-मालाएं पहनाकर उसके नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। शनिवार को यह नन्हा हाथी पीलीभीत पहुंचा। जहां पीटीआर पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार की निगरानी में रखा गया है। अब अन्य हाथियों के साथ उसकी देखरेख और परवरिश की जाएगी।

 

यह पूरा मामला बिजनौर की बढ़ावपुर वन रेंज की रामजीवाला बीट का है। बीते दो दिसंबर को जंगल में एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के कुछ समय बाद ही किसी तरह बच्चा लुढ़ककर गड्ढे में गिर गया। इसी दौरान हथिनी की आवाज पास के जंगल में सुनाई दी, लेकिन वह बच्चे के पास नहीं लौटी। पड़ोसी जंगल में रह रहे वन गुर्जरों ने हथिनी की आवाज और गड्ढे में गिरे बच्चे को देखकर वन विभाग को सूचना दी। जानकारी मिलते ही वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद दुधमुंहे हाथी के बच्चे को सुरक्षित गड्ढे से बाहर निकाला गया। हालांकि उस समय हथिनी मौके पर मौजूद नहीं थी। रेस्क्यू के बाद वनकर्मियों ने आसपास के जंगलों में हथिनी की तलाश शुरू की। पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई, निर्देश मिलने के बाद अलग-अलग टीमें बनाकर हथिनी की खोज कराई गई। कई दिनों तक जंगल खंगाले गए, लेकिन हथिनी का कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका।  वन विभाग की ओर से हथिनी और बच्चे को मिलाने के लिए कई प्रयास किए गए। बच्चे को उसी क्षेत्र में रखा गया, ताकि हथिनी लौटकर उसे अपने साथ ले जा सके। इस दौरान हथिनी दो बार बच्चे के नजदीक भी आई, लेकिन उसे अपनाए बिना लौट गई‌। तमाम कोशिशों के बावजूद मां और बच्चे का मिलन नहीं हो सका। मां से बिछड़ने के बाद हाथी के बच्चे को वन रेंज में ही पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया, उसे नियमित रूप से दूध पिलाया गया और ठंड से बचाव के पूरे इंतजाम किए गए।हाथी के बच्चे की सुरक्षा और बेहतर देखभाल को देखते हुए वनविभाग  के उच्चाधिकारियों ने उसे पीलीभीत टाइगर रिजर्व भेजने का निर्णय लिया।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व पहुंचने पर अधिकारियों ने नन्हे करभ स्वागत कर माला रेंज में बने विशेष बाड़े में ठहरने का इंतजाम किया है। जहां पीटीआर के पशु-चिकित्सक डॉ० दक्ष गंगवार की निगरानी में रखा गया है। जहाँ विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे उसकी शारीरिक गतिविधियों, तापमान और आहार पर नजर रख रही है। चूंकि करभ अभी बहुत छोटी है, इसलिए उसकी सेहत को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया जा रहा है।

डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि हाथी के बच्चे का पालन-पोषण एक मानव शिशु की तरह करना पड़ता है। उसे मां के दूध के विकल्प के तौर पर खास फॉर्मूला डाइट दी जा रही है। इसके लिए एक समर्पित टीम तैनात की गई है, जो पल-पल की रिपोर्ट साझा करेगी।विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी परवरिश की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि नन्हा हाथी सुरक्षित माहौल में बड़ा हो और उसे किसी तरह की कमी महसूस न हो। अब हाथी का बच्चा पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पहले से मौजूद हाथियों   निसर्गा, सूर्या, मणिकांत और भीम  के साथ रहेगा। जहां हाथियों की देखरेख के लिए पहले से बेहतर व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

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