उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 2024 में हुई हिंसा के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।


 जज ने अपने फैसले में मनुस्मृति के श्लोक "दंड शास्ति प्रजा: सर्वा दंड एवाभिरक्षित। दंड सुप्तेषु जागर्ति, दंड धर्म विदुर्वधा" का हवाला दिया, जिसका अर्थ है कि दंड ही प्रजा की रक्षा करता है और दंड का भय समाज को अनुशासित रखता है।
बहराइच जिले के महाराजगंज इलाके में 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जज पवन कुमार शर्मा ने मुख्य दोषी सरफराज उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि 9 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है।
जज ने मनुस्मृति का श्लोक पढ़कर सुनाई सजा जज पवन कुमार शर्मा ने अपने फैसले में मनुस्मृति के श्लोक "दंड शास्ति प्रजा: सर्वा दंड एवाभिरक्षित। दंड सुप्तेषु जागर्ति, दंड धर्म विदुर्वधा" का हवाला दिया, जो कि दंड व्यवस्था के महत्व को दर्शाता है। जज ने कहा कि दंड का भय समाज को अनुशासित रखता है और अपराधियों को दंडित करना शासक का परमधर्म है।
जज के फैसले पर सेकुलर नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मनुस्मृति का हवाला देना संविधान के खिलाफ है। लेकिन जज पवन कुमार शर्मा ने कहा कि मनुस्मृति के श्लोक का हवाला देना न्यायिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है, ताकि समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।
बहराइच हिंसा मामले में जज ने मनुस्मृति का श्लोक पढ़कर सुनाई सजा
मुख्य दोषी सरफराज उर्फ रिंकू को फांसी की सजा सुनाई गई है
9 अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है
जज ने मनुस्मृति के श्लोक "दंड शास्ति प्रजा: सर्वा दंड एवाभिरक्षित। दंड सुप्तेषु जागर्ति, दंड धर्म विदुर्वधा" का हवाला दिया ।

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