Margashirsha Amavasya 2025: हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष अमावस्या को सभी अमावस्या में शुभ माना जाता है। वहीं इस तिथि के दिन पितरों का तर्पण और भगवान विष्णु की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि मार्गशीर्ष अमावस्या कब है?


Margashirsha Amavasya 2025: हिंदू पंचांग के हिसाब से मार्गशीर्ष महीना को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। इस दिन पितरों का तर्पण करने का भी विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में भी कहा है, महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं। साथ ही यह दिन चंद्रदेव को भी समर्पित है। अब ऐसे में इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या कब है और इस दिन पितरों का तर्पण और भगवान विष्णु की पूजा किस मुहूर्त में करना है? आइए इस लेख में विस्तार से ज्योतिषाचार्य पंडित दयानंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं।

मार्गशीर्ष अमावस्या कब है?

मार्गशीर्ष माह की अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2025 की सुबह 9 बजकर 43 मिनट शुरू हो रही है और इसका समापन अगले दिन 20 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर हो जाएगा। इसलिए उदया तिथि के हिसाब से मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर को है।

 

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण कब करें? 

पितरों का तर्पण करने का कार्य विशेष रूप से दोपहर के समय किया जाता है, जिसे कुतुप काल या अपराह्न काल कहते हैं। 
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण और पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 11:30 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक का है।

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा का मुहूर्त 

भगवान विष्णु की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए आप सुबह  05:01 बजे से सुबह 05:54 बजे तक पूजा-पाठ कर सकते हैं।


मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पूजा का महत्व 

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही अगर आपके जीवन में किसी तरह की कोई समस्या आ रही है तो आप इस दिन दान-पुण्य के साथ-साथ मंत्रों का जाप विशेष रूप से करें। इससे भाग्योदय हो सकता है और इस दिन पितरों का तर्पण करने से पितृदोष से छुटकारा मिल सकता है।


 

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