थाना समाधान दिवस पर उमड़ी फरियादियों की भीड़: दबंगों के कब्जे से परेशान महिलाओं ने लगाई न्याय की गुहार (विशेष रिपोर्ट – रिपोर्टर शारदा प्रताप सिंह, जिगना) मिर्जापुर जनपद के जिगना थाना परिसर में शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और पुरुष अपनी-अपन


थाना समाधान दिवस पर उमड़ी फरियादियों की भीड़: दबंगों के कब्जे से परेशान महिलाओं ने लगाई न्याय की गुहार
(विशेष रिपोर्ट – रिपोर्टर शारदा प्रताप सिंह, जिगना)

मिर्जापुर जनपद के जिगना थाना परिसर में शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और पुरुष अपनी-अपनी शिकायतें लेकर पहुँचे। थाना परिसर सुबह से ही फरियादियों की भीड़ से खचाखच भरा रहा। थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने सभी मामलों को गंभीरता से सुनते हुए मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों और लेखपालों के साथ मिलकर समाधान के प्रयास किए।

इस दौरान जिगना क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए लगभग 30 फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर थाने पहुँचे। कई शिकायतों का स्थल पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि कुछ जटिल मामलों को संबंधित विभागों को अग्रसारित किया गया।

वन विभाग की जमीन पर कब्जे का मामला बना चर्चा का विषय

थाना समाधान दिवस के दौरान सबसे प्रमुख और गंभीर मामला बघेड़ा खुर्द गांव से जुड़ा रहा। गांव की लगभग पच्चीस महिलाओं का एक समूह थाना प्रभारी के समक्ष पहुँचा और वन विभाग की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे की शिकायत दर्ज कराई।

महिलाओं ने बताया कि गांव के कुछ दबंग लोग वर्षों से सरकारी वन भूमि पर अनधिकृत कब्जा कर मकान और बाड़ा बना रहे हैं। कई बार इसकी शिकायत ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

एक महिला फरियादी सुशीला देवी ने कहा, “हमारे गांव की सरकारी जमीन दबंगों ने जोत-बो दी है। वहां अब कोई पेड़-पौधा नहीं बचा। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। अब हम न्याय की उम्मीद लेकर थाना समाधान दिवस में आए हैं।”

थाना प्रभारी का जवाब और कार्रवाई का आश्वासन

इस गंभीर प्रकरण पर थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने तुरंत संबंधित लेखपाल और राजस्व निरीक्षक को बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं को आश्वस्त किया कि जैसे ही राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचेंगे, मामले की संयुक्त जांच कराई जाएगी और कब्जा हटवाया जाएगा।

थाना प्रभारी ने कहा, “यह बेहद गंभीर मामला है। सरकारी भूमि पर कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, अधिकारियों की अनुपस्थिति में मौके पर निस्तारण संभव नहीं था, लेकिन जांच के बाद कार्रवाई तय है।”

थाने पर ही निपटाए गए कई विवाद

समाधान दिवस पर आए कई मामलों का निपटारा मौके पर ही कर दिया गया।

कुछ विवाद भूमि सीमांकन और पारिवारिक झगड़ों से जुड़े थे, जिन्हें आपसी समझौते से सुलझा लिया गया।

कुछ फरियादें पेंशन, राशन कार्ड और आवास योजनाओं से संबंधित थीं, जिन्हें संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया।

वहीं, कई लोगों ने पुलिस रिपोर्ट दर्ज न होने की शिकायतें भी कीं, जिन पर थाना प्रभारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने कहा, “थाना समाधान दिवस का उद्देश्य यही है कि जनता को थाने या तहसील के चक्कर न लगाने पड़ें। हम हर मामले को प्राथमिकता से सुनते हैं और यथास्थान समाधान का प्रयास करते हैं।”

आमजन का विश्वास बढ़ाने का प्रयास

ग्रामीणों का कहना है कि इस बार समाधान दिवस पर पुलिस का रवैया पहले से ज्यादा सकारात्मक और सहयोगपूर्ण दिखा।
रामलाल पटेल, निवासी बरगवां, ने बताया, “पहले जब हम शिकायत लेकर आते थे तो फाइलें इधर-उधर घूमती रहती थीं। लेकिन अब थाना प्रभारी खुद बैठकर सुन रहे हैं और अधिकारियों को मौके पर बुला रहे हैं। इससे जनता में भरोसा बढ़ा है।”

इसी तरह ग्राम प्रधान प्रतिनिधि महेंद्र सिंह ने कहा कि “समाधान दिवस ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संवाद का पुल बन गया है। अगर यही व्यवस्था नियमित रूप से बनी रहे, तो आधे विवाद तो गांव में ही खत्म हो जाएंगे।”

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी – एक सकारात्मक संकेत

थाना समाधान दिवस में इस बार खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में महिलाएं खुद अपनी शिकायतें लेकर आईं। पहले के वर्षों में महिलाओं की उपस्थिति सीमित रहती थी, लेकिन इस बार उन्होंने सक्रियता दिखाई।
बघेड़ा खुर्द, देवरी, महुंआ और धनेटी गांवों की महिलाओं ने न केवल शिकायत दर्ज कराई, बल्कि अपने पक्ष को विस्तार से प्रस्तुत किया।

थाना प्रभारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “महिलाओं का आगे आना प्रशासन की पारदर्शिता और जनता के जागरूक होने का प्रमाण है। हम उनकी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

लेखपालों और अधिकारियों की मौजूदगी

थाना समाधान दिवस में क्षेत्र के सभी लेखपाल, ग्राम प्रधान और क्षेत्रीय अधिकारी मौजूद रहे। प्रत्येक शिकायत को क्रमवार सुना गया और मौके पर आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई।
प्रत्येक अधिकारी को निर्देश दिया गया कि वे अगले सप्ताह के भीतर सभी लंबित प्रकरणों की जमीनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि अगली बैठक में उनका निस्तारण किया जा सके।

आम जनता की प्रतिक्रिया

फरियादियों ने कहा कि समाधान दिवस जैसी पहल ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक प्रशासन की पारदर्शिता को मजबूत करती है।
रेखा देवी, निवासी बघेड़ा खुर्द, ने कहा, “हमने पहली बार महसूस किया कि हमारी बात सीधे पुलिस अधिकारी तक पहुँची है। हमें उम्मीद है कि हमारी शिकायत पर जल्द कार्रवाई होगी।”

वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि केवल सुनवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान और जवाबदेही भी जरूरी है।
रामस्वरूप निषाद ने कहा, “हर बार शिकायतें सुन ली जाती हैं, लेकिन जब तक जिम्मेदार विभाग मौके पर जाकर कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक न्याय अधूरा रहेगा।”

निष्कर्ष: समाधान दिवस से उम्मीदें जीवित

थाना समाधान दिवस पर उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि जनता अब अपनी समस्याओं को संस्थागत माध्यमों से सुलझाने में विश्वास दिखा रही है। जिगना थाने में इस बार न केवल शिकायतें सुनी गईं, बल्कि कई मामलों में तुरंत कार्रवाई भी की गई।

हालांकि, वन विभाग की जमीन पर कब्जे जैसे गंभीर मामलों में अधिकारियों की अनुपस्थिति चिंता का विषय रही। यदि ऐसे मामलों में विभागीय समन्वय मजबूत किया जाए, तो समाधान दिवस की प्रभावशीलता और बढ़ सकती है।

थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह का यह कहना सार्थक प्रतीत होता है कि —
“जनता की समस्याओं को सुनना ही नहीं, बल्कि उनका समाधान करना ही असली प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

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