सरकार किसानों को केवल वोट बैंक समझती है” — राजेश कुमार सिद्धार्थ


“सरकार किसानों को केवल वोट बैंक समझती है” — राजेश कुमार सिद्धार्थ

सिधौली में आयोजित विशाल किसान सभा में बरसे किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष, बोले — किसान की मेहनत पर टिकी अर्थव्यवस्था को भाजपा ने बना दिया है राजनीतिक हथियार

सिधौली (जनपद सीतापुर)।
सिधौली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित एक विशाल किसान जनसभा में किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि —

सभा में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों, मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। धान की फसल बर्बादी, कृषि संकट, बढ़ती महंगाई और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर किसानों में भारी आक्रोश देखा गया।

धान की फसल बर्बाद, खेतों में पसरा सन्नाटा

लगातार कई दिनों तक हुई बारिश ने सिधौली, मिश्रिख, लहरपुर और आसपास के गांवों में धान की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। खेतों में पानी भर गया, पौधे सड़ गए, और किसानों का महीनों का परिश्रम बर्बाद हो गया।

ग्राम बघौना के किसान रामलाल गौतम ने कहा, “धान का एक दाना नहीं निकला। बीज, खाद, और मजदूरी सब कर्ज से ली थी। अब घर चलाना मुश्किल हो गया है।”
ग्राम पिपरी खुर्द की सरोजिनी देवी ने कहा, “हमने खेत में जान लगाई, लेकिन सरकार ने हाल पूछना भी जरूरी नहीं समझा।”

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “यह स्थिति किसी एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया, और सरकार के दफ्तरों में फाइलें धूल खा रही हैं। प्रशासन को चाहिए कि हर प्रभावित ब्लॉक में तत्काल राहत टीम भेजे।”

राजनीतिक उदासीनता पर तीखा प्रहार

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया किसानों के प्रति असंवेदनशील है। उन्होंने कहा कि “जब चुनाव आते हैं, तो किसान को सम्मान निधि और कर्जमाफी के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही किसान को भुला दिया जाता है। यही इस सरकार की असली नीति है।”

उन्होंने आगे कहा कि “किसान इस देश का अन्नदाता है, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे ‘मतदाता’ तक सीमित कर दिया है। किसानों की जमीनें अधिग्रहण के नाम पर छीनी जा रही हैं, बीमा कंपनियाँ उनके पैसे खा रही हैं, और सरकार केवल भाषण दे रही है।”

किसान की हालत — आंकड़ों में दर्द

सभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सिधौली ब्लॉक के लगभग 75 प्रतिशत किसानों की धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। औसतन एक बीघे में ₹18,000 का खर्च आया, जबकि उपज शून्य रही। कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र में 70 हज़ार हेक्टेयर धान की बुआई हुई थी, जिसमें से 45 हज़ार हेक्टेयर अब प्रभावित है।

इस नुकसान से किसान न केवल आर्थिक रूप से टूटे हैं, बल्कि रोजगार संकट भी गहराया है। खेतों में मजदूरी करने वाले हजारों श्रमिक अब बेरोजगार हो गए हैं।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसान की हालत देखकर भी सरकार की आंख नहीं खुल रही। यह वही सरकार है जिसने ‘दोगुनी आय’ का वादा किया था, लेकिन आज किसान अपनी फसल के साथ-साथ आत्मसम्मान भी खो बैठा है।”

“भाषण नहीं, कार्रवाई चाहिए”

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “भाजपा सरकार केवल भाषण देती है, काम नहीं करती। किसान को राहत चाहिए, नारे नहीं। जब उद्योगपतियों को हजारों करोड़ की टैक्स छूट दी जा सकती है, तो किसानों के लिए कुछ लाख रुपये क्यों नहीं?”

उन्होंने आगे कहा कि “सरकार टीवी चैनलों पर विज्ञापन चला रही है कि सब ठीक है, जबकि धरातल पर किसान त्राहिमाम कर रहा है। यह दोहरी नीति अब नहीं चलेगी। किसान अब जाग गया है।”

किसान कांग्रेस की प्रमुख मांगें

सभा के दौरान किसान कांग्रेस की ओर से निम्नलिखित प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखी गईं —

फसल नुकसान का तत्काल सर्वे — हर गांव में कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम भेजी जाए।

मुआवजा भुगतान — प्रति बीघा कम से कम ₹15,000 मुआवजा दिया जाए।

फसल बीमा पारदर्शिता — बीमा कंपनियों द्वारा दावों का भुगतान सीधे किसानों के खाते में किया जाए।

ऋण राहत योजना — प्रभावित किसानों के कर्ज माफ या स्थगित किए जाएं।

समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी — ताकि किसान को मंडी में लूट से बचाया जा सके।

ग्रामीण क्रेडिट सिस्टम सुधार — किसान को बैंक से बिना जटिल प्रक्रिया के ऋण उपलब्ध कराया जाए।

किसानों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “सरकार को चाहिए कि वह किसानों के प्रति नैतिक और आर्थिक दोनों जिम्मेदारी निभाए। फसल बर्बादी की भरपाई केवल कागजों में नहीं, किसानों के बैंक खाते में होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि “किसान की बदहाली को राजनीति से जोड़ना इस सरकार का सबसे बड़ा अपराध है। किसान का दर्द वोटों की गिनती से नहीं, उसकी मिट्टी से समझा जा सकता है।”

कांग्रेस की पहल — कृषि घोषणा पत्र

सभा में उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी किसानों की समस्याओं को लेकर एक ‘कृषि घोषणा पत्र’ तैयार कर रही है। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल होंगे —

न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी

बीमा योजना में पारदर्शिता

ग्रामीण कृषि बैंकिंग सुधार

प्राकृतिक आपदाओं के लिए स्थायी राहत कोष

महिला किसानों के लिए अलग सहायता योजना

उन्होंने कहा कि “कांग्रेस पार्टी किसानों को केवल वोट नहीं, सम्मान देना चाहती है। हम किसान को राजनीतिक साधन नहीं, देश का निर्माता मानते हैं।”

किसान एकता का आह्वान

सभा में किसानों को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा,

सभा में मौजूद किसानों ने इस आह्वान पर जोरदार समर्थन दिया और “किसान एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए।

प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया

सभा के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी सिधौली को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मुआवजा वितरण की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यदि सरकार 10 दिनों के भीतर राहत कार्य शुरू नहीं करती, तो किसान कांग्रेस ब्लॉक मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगी।

2027 के चुनाव की चेतावनी

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “यदि भाजपा सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाती, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान मुंहतोड़ जवाब देंगे। अब किसान ठगा नहीं जाएगा। जिसने हमारी फसल बर्बादी पर आंख मूंद ली, उसे हम सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।”

उन्होंने कहा कि “कांग्रेस किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी। अब किसान की तकदीर दिल्ली और लखनऊ में नहीं, अपने खेत में तय होगी।”

सभा का समापन और संकल्प

सभा के समापन पर राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि “किसान की ताकत देश की ताकत है। जब खेत बंजर होंगे तो शहर भी भूखे रहेंगे। इसलिए किसान का सम्मान बचाना देश की जिम्मेदारी है।”

सभा का समापन “जय किसान, जय संविधान” और “किसान एकता अमर रहे” के नारों से हुआ।
किसानों ने एक स्वर में कहा कि वे अब केवल फसल नहीं उगाएंगे, बल्कि अपने हक के लिए लड़ेंगे भी।

– राजेश कुमार सिद्धार्थ
प्रदेश उपाध्यक्ष, किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ
स्थान : सिधौली, जनपद सीतापुर

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