पीलीभीत में उस समय हड़कंप मच गया जब खेत में शिकार के लिए लगाए गए जाल में एक तेंदुआ फंस गया।
पीलीभीत से बड़ी खबर ब्यूरो चीफ: रमेश कुमार | स्थान: पीलीभीत
पीलीभीत में उस समय हड़कंप मच गया जब खेत में शिकार के लिए लगाए गए जाल में एक तेंदुआ फंस गया। ग्रामीणों ने जाल में फंसे तेंदुए को देखकर तत्काल वन विभाग को सूचना दी।
इसी बीच वन मंत्री के आगमन के दौरान इस घटना की जानकारी मिलने से पूरा महकमा सतर्क हो गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर तेंदुए को सुरक्षित जाल से बाहर निकाला।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वेटरनरी जांच (चिकित्सकीय परीक्षण) के बाद अनुमति मिलने पर तेंदुए को जंगल में छोड़ा जाएगा। यह पूरा मामला पीलीभीत शहर से सटे लुधपुरा गांव का बताया जा रहा है।
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सन 1982 में, कांशीराम ने "द चमचा युग" (The Era of the Stooges) नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने दलित नेताओं के लिए चमचा (stooge) शब्द का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा कि ये दलित लीडर केवल अपने निजी फायदे के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस जैसे दलों के साथ मिलकर राजनीति करते है
सन 2002 में, कांशीराम जी ने 14 अक्टूबर 2006 को डॉक्टर अम्बेडकर के धर्म परिवर्तन की 50 वीं वर्षगांठ के मौके पर बौद्ध धर्म ग्रहण करने की अपनी मंशा की घोषणा की थी
कांशीराम साहब ने सरकार की सकारात्मक कार्रवाई की योजना के तहत पुणे में विस्फोटक अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला को था जब उन्होंने पहली बार जातिगत भेदभाव का अनुभव किया. [कैसे?] उन्होंने ऑफिस में देखा कि जो कर्मचारी डॉक्टर आंबेडकर का जन्मदिन मनाने के लिए छुट्टी लेते थे उनके साथ ऑफिस में भेदभाव क
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