सन 1982 में, कांशीराम ने "द चमचा युग" (The Era of the Stooges) नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने दलित नेताओं के लिए चमचा (stooge) शब्द का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा कि ये दलित लीडर केवल अपने निजी फायदे के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस जैसे दलों के साथ मिलकर राजनीति करते है
सन 1982 में, कांशीराम ने "द चमचा युग" (The Era of the Stooges) नामक पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने दलित नेताओं के लिए चमचा (stooge) शब्द का इस्तेमाल किया था. उन्होंने कहा कि ये दलित लीडर केवल अपने निजी फायदे के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस जैसे दलों के साथ मिलकर राजनीति करते हैं.
उनकी पुस्तक बर्थ ऑफ़ BAMCEF भी प्रकाशित हुई थी. [27] उनकी जीवनी, कांशीराम: दलितों के नेता, बद्री नारायण तिवारी द्वारा लिखी गई थी,कांशीराम के भाषणों को एक किताब के रूप में अनुज कुमार द्वारा संकलित किया गया है इसका नाम है; "बहुजन नायक कांशीराम के अविस्मरणीय भाषण".इसके अलावा कांशीराम साहब के लेखन और भाषण को एस. एस. गौतम ने संकलित किया था जबकि कांशीराम द्वारा लिखे गए सम्पादकीय बहुजन समाज पब्लिकेशन ने 1997 में प्रकाशित किया था.
अंत में यह कहा जा सकता है कि भारत में अम्बेडकरवाद/पैक्टवाद /समझौतावाद अगर जिन्दा है तो इसका पूरा श्रेय सिर्फ कांशीराम को ही जाता है उन्होंने डॉक्टर आंबेडकर की मृत्यु के महार आन्दोलनों में पैदा हुए शून्य को ख़त्म करके बहुजन आन्दोलन को फिर से जीवित किया था..
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सन 2002 में, कांशीराम जी ने 14 अक्टूबर 2006 को डॉक्टर अम्बेडकर के धर्म परिवर्तन की 50 वीं वर्षगांठ के मौके पर बौद्ध धर्म ग्रहण करने की अपनी मंशा की घोषणा की थी
कांशीराम साहब ने सरकार की सकारात्मक कार्रवाई की योजना के तहत पुणे में विस्फोटक अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला को था जब उन्होंने पहली बार जातिगत भेदभाव का अनुभव किया. [कैसे?] उन्होंने ऑफिस में देखा कि जो कर्मचारी डॉक्टर आंबेडकर का जन्मदिन मनाने के लिए छुट्टी लेते थे उनके साथ ऑफिस में भेदभाव क
उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की आज जयंती है। भले ही हाल में हुए यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बहुजन समाज पार्टी को मात्र एक सीट मिली हो और भाजपा, सपा और कांग्रेस के सामने बसपा कमजोर पड़ गई हो लेकिन दलित राजनीति के जरिए यूपी में सालों
DM बस्ती व SP बस्ती द्वारा तहसील हरैया पर आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जनसुनवाई करते हुए शिकायतों को निष्पक्ष/त्वरित/ गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारण करने के ल
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