उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की आज जयंती है। भले ही हाल में हुए यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बहुजन समाज पार्टी को मात्र एक सीट मिली हो और भाजपा, सपा और कांग्रेस के सामने बसपा कमजोर पड़ गई हो लेकिन दलित राजनीति के जरिए यूपी में सालों


उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की आज जयंती है। भले ही हाल में हुए यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बहुजन समाज पार्टी को मात्र एक सीट मिली हो और भाजपा, सपा और कांग्रेस के सामने बसपा कमजोर पड़ गई हो लेकिन दलित राजनीति के जरिए यूपी में सालों सरकार में रहने वाली बहुजन समाज पार्टी की नींव बहुत मजबूत है। हो भी क्यों न पार्टी के संस्थापक और बहुजन आंदोलन के नेता कांशीराम ने पिछड़ा वर्ग के अधिकारों के लिए जो आवाज उठाई, उसकी गूंज आज भी याद की जाती है। 15 मार्च को कांशीराम का जन्मदिन होता है। कांशीराम ने बसपा की स्थापना करते समय कुछ सपने देखे थे। पार्टी आज कांशीराम की आकांक्षाओं पर कितनी खरी उतरी, इसका अवलोकन किया जाना चाहिए लेकिन उसके पहले कांशीराम के बारे में जान लेना चाहिए। कांशीराम की पिछड़ा वर्ग के लिए अपेक्षाएं, कांशीराम का राजनीतिक जीवन और उनसे जुड़ी रोचक बातों के बारे में जानिए।


 

Kanshi Ram Jayanti 2022 Bahujan Samaj Party Founder Kanshi Ram Interesting Facts

कांशीराम जयंती -

कांशीराम का जीवन परिचय

कांशीराम का जन्म ब्रिटिश शासन काल में पंजाब के रूपनगर (वर्तमान में रोपड़ जिले) में 15 मार्च 1934 को हुआ था। उन्होंने रोपड़ के शासकीय महाविद्यालय से 1956 में बीएससी की डिग्री हासिल की। बाद में पुणे में स्थित गोला बारूद फैक्ट्री में क्लास वन अधिकारी के पद पर उनकी नियुक्ति हुई। लेकिन उन्हें जातिगत आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर एक दलित कर्मचारी ने छुट्टी मांगी तो उसके साथ भेदभाव होने के बाद कांशीराम ने दलितों के लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया।

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कांशीराम जयंती - फोटो : facebook

दलितों के लिए कांशीराम का संघर्ष

कांशीराम डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की तरह चिंतक और बुद्धिजीवी नहीं थे लेकिन उनसे काफी प्रभावित थे। कांशीराम ने भारतीय राजनीति और समाज में एक बड़ा परिवर्तन लाने में अहम भूमिका निभाई। कांशीराम ने आंबेडकर के संविधान को धरातल पर उतारने के लिए काम किया। कांशीराम की आवाज को दबाने के लिए उन्हें नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया। इस पर कांशीराम ने उन्हें निलंबित करने वाले अधिकारी की पिटाई कर दी थी।

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कांशीराम जयंती - 

बसपा की स्थापना

कांशीराम ने बामसेफ की स्थापना की। यह न तो राजनीतिक पार्टी थी और न ही कोई धार्मिक संगठन। उसके बाद उन्होंने दलित शोषित समाज संघर्ष समिति नाम के सामाजिक संगठन की स्थापना की, जिस पर राजनीतिक प्रभाव भी रहता था।  इसके बाद कांशीराम जी ने दलितों के उत्थान के लिए बाबा साहेब आंबेडकर के जन्मदिन के मौके पर 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की।

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कांशीराम जयंती -

कांशीराम का राजनीतिक जीवन

बसपा की स्थापना के साथ ही कांशीराम पूर्णकालिक राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ता बन गए। कांशीराम ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छत्तीसगढ़ चुनाव से की। यहां जांजगीर चांपा से कांशीराम ने पहली बार चुनाव लड़ा। उनकी पार्टी ने बहुत कम समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति पर अपना छाप छोड़ी। कांशीराम ने इस विचारधारा का प्रचार किया कि हक के लिए लड़ना चाहिए, गिड़गिड़ाने से हक नहीं मिलेगा।

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कांशीराम जयंती -

कांशीराम और मायावती

बाद में कांशीराम की मुलाकात मायावती से हुई। वह मायावती के मार्गदर्शक बन गए। उन्होंने मायावी को बसपा के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर तैयार किया। हालांकि साल 2003 से कांशीराम ने राजनीति में अपनी सक्रियता कम कर दी और साल 2006 में कांशीराम का निधन हो गया। कांशीराम एक जमीनी कार्यकर्ता थे, चिंतक थे, जिन्होंने दलित उत्थान का सपना देखा था। 

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