आवारा पशुओं पर विचार — एक जागरूकता संदेश
आज हमारे समाज में आवारा पशुओं की स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है। आए दिन सड़कों पर दुर्घटनाएँ हो रही हैं जिनका एक बड़ा कारण ये असहाय पशु हैं। न तो इन्हें उचित भोजन मिल पा रहा है, न ही सुरक्षित आश्रय स्थल, और न ही किसी प्रकार की चिकित्सीय सुविधा।
ऐसा प्रतीत होता है कि मानो मनुष्यता धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। हम सभी गाय का दूध पीकर बड़े हुए हैं, किंतु आज वही गाय कूड़े-कचरे में कुछ खाने को मजबूर है। और हम सब भली-भांति जानते हैं कि कूड़े में क्या-क्या फेंका जाता है — जैसे बच्चों के डायपर, महिलाओं के सेनेटरी पैड और अन्य हानिकारक वस्तुएँ।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि “गाय में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है।” यदि ऐसा है, तो सोचिए — क्या हम उन देवी-देवताओं का अपमान नहीं कर रहे जो हमारे धर्म, संस्कृति और करुणा के प्रतीक हैं?
आज आवश्यकता है कि हम अपने भीतर की मानवता और पशु-प्रेम को पुनर्जीवित करें।
हम सबको मिलकर यह संकल्प लेना चाहिए कि —
कोई भी पशु भूखा न सोए।
उन्हें सुरक्षित आश्रय और उपचार मिले।
सड़कों को दुर्घटनाओं से मुक्त बनाया जाए।
याद रखिए — मनुष्य वही है जिसके भीतर दया जीवित है,
और दया का सबसे सच्चा रूप पशु-प्रेम है। ????️
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