कई दुर्लभ जीवों का कुनबा भी बढ़ रहा है। यहां कांटेदार जानवर शाही की बेहतर मौजूदगी दर्ज की गई है।


पीलीभीत टाइगर रिज़र्व को बाघों की संख्या तेज़ी से बढ़ाने के चलते दुनिया भर में ख्याति प्राप्त है। लेकिन यहां न केवल बाघ बल्कि कई दुर्लभ जीवों का कुनबा भी बढ़ रहा है। यहां कांटेदार जानवर शाही की बेहतर मौजूदगी दर्ज की गई है। पीटीआर के कोर और बफर जोन दोनों क्षेत्रों में शाही की बेहतर मौजूदगी दर्ज की गई है। शाही की मौजूदगी रिजर्व की जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला के संतुलन का सकारात्मक संकेत है। हाल के दिनों में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मौजूद तृणभोजी वन्यजीवों की गणना करने के लिए वृहद रूप से जंगल के भीतर कैमरा ट्रैप निगरानी के दौरान बीते कुछ महीनों में शाही की गतिविधियों को दर्ज किया गया। इस गणना के आंकड़े वन्यजीव संरक्षण के लिहाज़ से काफी सकारात्मक साबित हुए।

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व में शाही की संख्या में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई है, शाही की मौजूदगी बताती है कि जंगल का पर्यावरण अनुकूल है। यह छोटा लेकिन अहम जीव न केवल शिकारियों से खुद को बचाने में सक्षम है, बल्कि जंगल की पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती देता है। बाघ जैसे बड़े शिकारी जीवों की मौजूदगी के साथ-साथ ऐसे मध्यम स्तर के जीवों का पनपना जंगल के स्वास्थ्य को दर्शाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का यह मानना भी है कि सेही जैसे जीव मिट्टी को खोदकर उसकी उर्वरता बढ़ाने और बीजों के फैलाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि इनकी मौजूदगी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। शाही अपने शरीर पर मौजूद लंबे कांटों से दुश्मनों से बचाव करता है। खतरा महसूस होने पर ये कांटे खड़े हो जाते हैं। इनकी औसत उम्र 15-20 साल तक होती है।शाही मुख्य रूप से शाकाहारी होता है और जड़ों, फलों, कंदों व सब्जियों पर निर्भर रहता है। यह रात में सक्रिय रहता है और दिन में बिलों में छिपकर आराम करता है।कृषि क्षेत्रों के आसपास भी इसकी मौजूदगी पाई जाती है, जहां यह फसलों को नुकसान भी पहुंचाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों और वन अधिकारियों के अनुसार शाही का स्वभाव आक्रामक नहीं होता। यह एक शर्मीला जानवर है, रात्रिचर होने के साथ शाकाहारी भी होता है। अमूमन यह अपना बिल बना कर उसमें छिपकर रहता है और केवल भोजन के लिए बाहर निकलता है। इसकी पूंछ के हिस्से में कांटे होते हैं जो कठोर होते हैं। जैसे ही कोई बड़ा जानवर इस पर हमलावर करता है तो यह अपने बचाव में कांटों को खड़ा कर लेता है। कई बार बाघ और तेंदुए जैसे वन्यजीव इसका शिकार करते समय इसके कांटों से घायल हो जाते हैं। पंजों में कांटा लग जाने से उनके शिकार पर असर पड़ता है, जो सीधे उनके सर्वाइवल से संबंधित होता है। शाही की शारीरिक संरचना के मुताबिक इसके कांटों पर हल्का सा भी दाब पड़ने पर ये शरीर से अलग हो जाते हैं और दूसरे जानवर के शरीर में धंस जाते हैं।

हाल के दिनों में हुई गणना में सेही की सबसे अधिक मौजूदगी पीटीआर की बराही रेंज में दर्ज की गई। बराही में 277, माला में 264, महोफ में 273, हरीपुर में 152 व दियोरिया में 71 सेही की मौजूदगी दर्ज की गई। कुल संख्या 1037 दर्ज की गई है।

पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह के अनुसार पीटीआर में सेही की यह सक्रियता इस क्षेत्र की जैव विविधता का अनूठा उदाहरण है और यह साबित करती है कि यहां केवल बाघ ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित आवास उपलब्ध है।

राजकुमार वर्मा 
अबतक न्याय पीलीभीत

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