बरेली। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की धर्मपत्नी डॉ. सविता अंबेडकर (माई अंबेडकर) का बरेली से एक खास नाता रहा है। 30 मई 2003 को वह यहां बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनोज हरित के परिवार के आमंत्रण पर पहुंची थीं। करीब सात घंटे का यह प्रवास न केवल हरित परिवार बल्कि बरेली के इतिहास के लिए भी अविस्मरणीय बन गया।
सादगी और सहजता के लिए जानी जाने वाली सविता अंबेडकर ने उस दिन भी सभी का दिल जीत लिया। साधारण साड़ी में सुसज्जित और दाल-चावल व गुड़ जैसे बेहद साधारण भोजन की पसंद ने उनकी सरल जीवनशैली की झलक दी। परिवार संग बैठकर उन्होंने डॉ. अंबेडकर के निजी जीवन और संघर्ष से जुड़े कई प्रसंग साझा किए।
मनोज हरित बताते हैं कि सविता जी ने उनसे कहा था—“मैंने बाबा साहब से विवाह सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उनकी तबीयत अक्सर खराब रहती थी। मैं चाहती थी कि उनकी देखभाल कर सकूँ।” उन्होंने यह भी कहा था कि “मेरे लिए पूरे दलित समाज के लोग बाबा साहब का ही परिवार हैं।”
हरित परिवार आज भी उस दिन की स्मृतियों को संजोए हुए है। परिवार के पास वह कप और बर्तन अब भी सुरक्षित हैं जिनमें सविता जी ने भोजन किया था। यहां तक कि उस दौरान उनकी मां ने उन्हें एक शॉल भेंट की थी, जिसे वह लखनऊ ले गईं।
स्थानीय अखबारों ने भी उस समय उनके बरेली आगमन को प्रमुखता दी थी। हरित परिवार मानता है कि यह मुलाक़ात केवल एक निजी पल नहीं, बल्कि ऐसा ऐतिहासिक अवसर था जिसने बाबा साहब और उनके परिवार की सादगी व समर्पण को नजदीक से समझने का अवसर दिया।
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