Rajesh Kumar Siddharth राजेश कुमार सिद्धार्थ


इस वर्ष 12 फरवरी, बुधवार को गुरु रविदास जयंती मनाई जा रही है। संत रविदास ने समाज में फैली ऊंच-नीच की सोच को अपने दोहों और उपदेशों के माध्यम से चुनौती दी थी। उनकी जयंती के अवसर पर पूरे देश में भजन-कीर्तन, शोभायात्राएं और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कहा जाता है कि उनकी भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान से प्रभावित होकर मीरा बाई ने भी भक्ति मार्ग अपनाया था। इस पावन दिन पर अपने प्रियजनों को गुरु रविदास जयंती की शुभकामनाएं देना न भूलें।
2. कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।

3. रविदास जन्म के कारनै होत न कोउ नीच
नकर कूं नीच करि डारि है ओछे करम की कीच।

Ravidas jayanti.


4. ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन
पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन।

5. जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात,
रैदास मनुष ना जुड़ सके, जब तक जाति न जात।

6. मन चंगा तो कठौती में गंगा,
संत परंपरा के महान योगी,
परम ज्ञानी संत श्री रविदास जी,
आपको कोटि-कोटि नमन।

7. जन्म जात मत पूछिए, का जात और पात।
रैदास पूत सम प्रभु के कोई नहिं जात-कुजात।

8. अगर अच्छा नहीं कर सकते,
तो कम से कम दूसरों को नुकसान न पहुचाएं।
अगर फूल नहीं बन सकते हैं,
तो कम से कम कांटे न बनें।

9. गुरु जी मैं तेरी पतंग, हवा में उड़ जाऊंगी,
अपने हाथों से न छोड़ना डोर, वरना मैं कट जाऊंगी।
 

Ravidas ji.


10. ऐसा चाहूं राज मैं जहां मिले सबन को अन्न।
छोट बड़ो सब सम बसे रविदास रहे प्रसन्न।।

11. भला किसी का नहीं कर सकते,
तो बुरा किसी का मत करना,
फूल जो नहीं बन सकते तुम,
तो कांटा बनकर भी मत रहना।

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