Manipur Violence: मई 2023 में शुरू हुए इस संघर्ष में 250 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं. तनाव मुख्य रूप से इम्फाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और आस-पास की पहाड़ियों में रहने वाले कुकी समुदायों समूहों के बीच है.


मणिपुर में पिछले करीब 19 महीनों से हिंसा जारी है और ये हिंसा कब खत्म होगी, इसको लेकर फिलहाल कोई सटीक जानकारी नहीं है. एक दिन पहले यहां काकचिंग जिले में दो मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. घटना के बाद यहां एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. लोगों में दहशत का माहौल हो गया है. इस पूर्वोत्तर राज्य में 3 मई 2023 से हिंसा जारी है जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है.

मणिपुर हिंसा पर क्या बोले शाह?

मणिपुर में हालात कब सुधरेंगे, पिछले करीब 600 दिन से जारी हिंसा कब होगी, इसको लेकर जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया गया तो उन्होंने मणिपुर में जारी हिंसा को जातीय संघर्ष बताया. एक निजी चैनल से बातचीत में शाह ने कहा, मणिपुर में जारी हिंसा एक जातीय संघर्ष है. इसका आतंकवाद या धर्म से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा का अपना एक इतिहास है.

मैं यह बात बहाने के तौर पर नहीं कह रहा, बल्कि बैकग्राउंड बता रहा हूं. मणिपुर में जब-जब नस्लीय हिंसा हुई, एक-डेढ़ साल तक ये चली. कई बार तो ये तीन साल तक चली है और इसमें बहुत सारे लोग इसमें मारे गए हैं. ये नस्लीय हिंसा के कारण हुआ है. हालांकि, हिंसा अब काफी कम हुई है इसलिए ये लोग संसद में हो हल्ला करके उकसाना भी चाहते हैं. मगर मुझे अब विश्वास है कि स्थिति ठीक हो जाएगी.

मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी है हिंसा

मणिपुर पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से जातीय संघर्ष से जूझ रहा है. मई 2023 में शुरू हुए इस संघर्ष में 250 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं. तनाव मुख्य रूप से इम्फाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और आस-पास की पहाड़ियों में रहने वाले कुकी समुदायों समूहों के बीच है. पिछले साल बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में एकता मार्च निकाले जाने के बाद जो जातीय हिंसा भड़की थी, वो आज तक जारी है.

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