लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबद्ध अरबी फारसी मदरसों की बिना मान्यता कामिल/फाजिल की करीब 38 हजार छात्रों की परीक्षा कराने को लेकर शुक्रवार को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भी कोई रास्ता नहीं निकल सका।
मंत्री ने कामिल/फाजिल वाले मदरसों को ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय से संबद्ध करने के प्रस्ताव पर समीक्षा की। समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि इन मदरसों की संबद्धता में सबसे बड़ी कठिनाई उनका भाषा विश्वविद्यालय के तय मानकों पर खरा नहीं उतरना है। ऐसे में अब कामिल/फाजिल की परीक्षाएं कराने का रास्ता निकालने के लिए मंत्री ने अधिकारियों को जल्द ही अगली बैठक में बुलाया है।
बोर्ड को मान्यता देने का अधिकार नहीं
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड को कामिल/फाजिल की परीक्षाएं कराने और उसको मान्यता देने का अधिकार नहीं था। वर्षों से बोर्ड कामिल/फाजिल की परीक्षाएं करा रहा था। जिसे मान्यता ही नहीं मिली थी। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी थी।
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