अब तक न्याय संवाददाता          बोरावड़ कस्बे 221वा भिक्षु चरमोत्सव कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 


अब तक न्याय संवाददाता 
       
बोरावड़ कस्बे 221वा भिक्षु चरमोत्सव कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 
        
 बोरावड़  ( मुकेश जोया )-  बोरावड़  कस्बे के  तेरापंथ भवन, बोथरा बास मे युग प्रधान आचार्य श्रीमहाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी प्रांजल प्रभा जी ठाणा 4 के सानिध्य मे 221 वा भिक्षु चरमोत्सव कार्यक्रम का आयोजन हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल मंत्रोच्चारण के साथ हुआ।श्रीमती आभा गेलङा ने भिक्षु अष्टकम से मंगलाचरण किया।साध्वी श्री प्रांजल प्रभा जी ने अपने उद्बबोधन मे फरमाया कि कंटालिया मे भीखण नाम का एक ऐसा सुमन महका और अपनी पराग लुटाकर विलीन हो गया सिरियारी की पावन धरा मे। भिखण-एक ऐसा सूरज उदित हुआ जो तेजस्वी जीवन का सन्देश देकर विलीन हो गया समय के सागर मे। वह सूरज अपने व्यक्तित्व की रश्मिया बिखेर गया। आचार्य भिक्षु  के आदि मध्य और अन्त मे आत्मा ही आत्मा थी। वे आत्म केन्द्रित थे अतः सत्यनिष्ठ थे। उनकी सत्यनिष्ठा उनके आचारनिष्ठा का आधार स्तम्भ था।आचार्य भिक्षु ने आचार ओर विचार की शिथिलता को कभी महत्व नही दिया। उनके लिए आचार एक नम्बर पर और संख्या वृध्दि दो नम्बर पर थी। वे आचार निष्ठ, मर्यादा निष्ठ, अनुशासन निष्ठ ओर आत्म निष्ठ के पर्याय थे। साध्वी श्री रूचिप्रभा जी ओर साध्वी श्री गोतमप्रभा जी ने अपनी सुमधुर गीतिका से अपने आराध्य की अभ्यर्थना की। साध्वी श्री मध्यस्थप्रभा जी ने वक्तव्य से अपनी श्रध्दांजलि अर्पित की। स्थानीय तेरापंथ सभा के मंत्री श्रीमान रायचंद बोथरा ने भी अपने भावो की प्रस्तुति दी। अपने आधप्रणेता आचार्य भिक्षु के स्तुति मे स्थानीय तेरापंथ समाज बोरावङ ने भिक्षु म्हारे प्रगटया जी का जाप किया।कार्यक्रम का समापन संघ  गान के साथ हुआ। 
सायंकालीन धम्मजागरण का कार्यक्रम रखा गया। जिसमे सभी भाई बहिनो ने भक्ति भरे गीतो का संगान कर अपने आराध्य देव को श्रध्दांजलि अर्पित की।

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