21वीं सदी के डिजिटल जमाने में लोग सोशल मीडिया को मनोरंजन के साथ-साथ अपने कंटेंट के द्वारा मोटी कमाई भी कर अपने डिजिटल संपत्ति की वैल्यू बढ़ा रहे हैं। ऐसे में अगर सोशल मीडिया अकाउंट के होल्डर की मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनी चनने का क्या है नियम।


डिजिटल इंडिया की रेस में सबसे बड़ी भूमिका सोशल मीडिया ने ही निभाई है। आज कल हर इंसान कंटेंट क्रिएट करने में लगा है और अपने फेसबुक, यूट्यूब, इंटाग्राम, ट्विटर, ब्लॉग जैसे तमाम सोशल मीडिया पर अपनी डिजिटल संपत्ति बना रहा है।

अब वो जमाना गया जब सोशल मीडिया लोग सिर्फ मनोरंजन के लिए उपयोग करते थे। आज कल लोग अपनी नौकरियां छोड़कर यूट्यूब सहित अन्य प्लेटफार्म से मोटी कमाई कर रहे हैं और अपनी डिजिटल संपत्ति की वैल्यू बढ़ा रहे हैं।

 

ऐसे में अब अगर किसी कारण से उस अकांउट होल्डर की मृत्यु हो जाती है तो इस स्थिति में उस अकाउंट का उत्तराधिकारी कौन होगा या नॉमिनी कैसे चुना जाएगा और क्या है डिजिटल संपत्ति को ट्रांसफर करने के नियम? आज हम आपको इन सभी सवालों का जवाब देंगे।

गूगल और यूट्यूब

सोशल मीडिया प्लेटफार्म में कमाई के मामले में सबसे उपर यूट्यूब का ही नाम आता है। हर दिन लाखों कंटेंट क्रिएटर्स यूट्यूब पर अपना चैनल बनाते हैं और करोड़ो यूजर्स प्रतिदिन करोड़ो मिनट का स्क्रीन टाइम देते हैं।

यूट्यूब और गूगल पर किसी अकांउट होल्डर की मृत्यु होने पर उनके परिवार का कोई भी मेंमबर सारे डेटा को एक्सेस करने और उस अकाउंट के द्वारा कमाए हुए पैसों के लिए गूगल से संपर्क कर अपनी समस्या बता सकता है।

इसके बाद पर्याप्त कागजात जैसे अकाउंट ओनर का डेथ सर्टिफिकेट सहित अन्य सबूतों के वेरिफिकेशन के बाद गूगल उस अकाउंट से एक्सेस और पैसे उनके परिवार को दे देगा।

फेसबुक

मेटा स्वामित्व वाली फेसबुक के जरिए कमाई करने वाले अकाउंट होल्डर्स मेमोरी सेटिंग्स के तहत अपने अकाउंट का नॉमिनी बना सकते हैं।

यह नॉमिनी कॉन्टैक्स पेज में उपलब्ध जानकारी को जरूरत के वक्त इस्माल कर उसे संभाल सकता है या फिर अगर नॉमिनी चाहे तो उस अकाउंट को हमेशा के लिए डिलीट भी कर सकता है।

ट्विटर और लिंक्डइन

ये दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अकाउंट होल्डर को नॉमिनी बनाने का ऑप्शन नहीं देते हैं। अगर अकाउंट होल्डर के परिवार वाले चाहें तो उसका अकाउंट परमानेंट डिलीट करने के लिए आवेदन दे सकते है। कंपनी इस आवेदन पर विचार कर वैरिफीकेशन के बाद इसे डिलीट कर देगी।

देश में डिजिटल संपत्ति का कानून नहीं

देश में इस वक्त जैसे अपनी संपत्ति को वसीयत करने की सुविधा मौजूद है वैसे डिजिटल संपत्ति को किसी और के नाम पर करने की कोई भी कानूनी प्रक्रिया या नियम इस वक्त देश में मौजूद नहीं है।

औपचारिक और कानूनी तौर पर आप अपनी डिजिटल संपत्ति किसी के नाम पर भी ट्रांसफर नहीं कर सकते हालांकि आप अपनी संपत्ति चाहें तो अनऔपचारिक तौर पर किसी के नाम जरूर कर सकते हैं। आप इसके लिए एक अनौपचारिक दस्तावेज लिख सकते हैं जिसके बाद आपके निधन के बाद वो संपत्ति उस व्यक्ति को दी जाएगी जिसे आपने चयनीत किया हो।

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Rajesh Kumar Siddharth

अब तक इंडिया लाइव न्यूज़ चैनल

राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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