बलि के बकरे ब्रज भूषण कब चढ़ेंगे बलि


बलि के बकरे ब्रज भूषण कब चढ़ेंगे बलि
       गजब की शतरंज की बिसात बिछी है दिल्ली के दिल कनाट प्लेस के जंतर मंतर पर। मोहरे श्याम और स्वेत अवश्य सजे हैं लेकिन दोनों तरफ़ खिलाड़ी एक ही है। अद्वितीय शातिर दिमाग वाला शतरंज का बेताज बादशाह   मोहरों की एक एक चाल को बड़ी बारीकी से चलता है। खुद के मोहरों को एक दूसरे से पिटवा देता है। लोमड़ी जैसी अय्यारी का खज़ाना समेट कर रखता है। स्वयं को चाणक्य और अजातशत्रु का उत्तराधिकारी समझता है।
           जंतर मंतर पर चल रहा ओलंपियन का धरना नाबालिक लड़की और लड़कियों के यौन उत्पीड़न के खिलाफ़ एक संगठित आवाज़ है। दिल्ली पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन है  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बीजेपी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यौन उत्पीड़न की शिकार बेटियां गांव में जानवरों का चोथ उठाकर कंडा बनाने वाली नही है। कुश्ती की दुनिया में भारत का डंका बजाने में देश के स्वाभिमान की प्रतीक हैं। खेल के बीच यह कौन सा दंगल शुरू हो गया है? भ्रमित हूं बेटी अभिमान की रक्षक; BJP आखिर किसके साथ खड़ी है, यौन पीड़ित महिला पहलवानो के न्याय हित में या कामदेव अवतारी ब्रज भूषण सिंह? दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता हाजमा ख़राब कर रही है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जानकारी में यह घटना नही होगी, विश्वास करना सहज नही होगा। प्रश्न उठता है कि क्या दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता गृह मंत्री की सहमति का नतीज़ा है?
        दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र में ओलंपियन लड़कियों को अपने साथ हो रहे यौन उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराने के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। न्यायालय के दख़ल के बाद एफआईआर दर्ज तो हुई लेकिन पुलिस की जांच अभी भी बर्फ की सिल्ली के नीचे दब कर ठिठुरी है। लोकतन्त्र में फिसड्डी देश अमेरिका में यौन उत्पीड़न के मामले में पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जेल की हवा खा सकते हैं लेकिन विश्व गुरू भारत में कामदेव के नए अवतार ब्रज भूषण शरण सिंह के खिलाफ जांच कब शुरू होगी कहना मुुश्किल है। भारत दुनिया में एक मात्र देश है जहां कामदेव की पूजा होती है इसलिए हमारा देश विश्व गुरू है। संभव है दुनिया के देशों ने हमें चिढ़ाने के लिए विश्व गुरू कहना शुरू किया हो हम ठहरे आत्मश्लाघी,धब्बे को भी अपनी उपलब्धि मान ली है। सबसे विश्वसनीय पहलू यह भी है कि हमने स्वयं को ही विश्व गुरू घोषित कर लिया है। खु़द की पीठ थपथपाने की हमारी पुरानी आदत है। पिटने के बाद कपड़े से मिट्टी झाड़ कर हम स्वयं को अप्रतिरोध्य घोषित कर लेते हैं।
          जिस कामदेव को पूरी आस्था के साथ हम भारत वासी ईश्वर मानते हैं, आराधना करते हैं उसके नए अवतार के खिलाफ़ जांच करके उन्हें अपमानित करने, उनके प्रकोप का शिकार बनने का जोख़िम कैसे उठा सकते हैं; शायद यही मनोदशा जांच एजेन्सी को अपना कार्य करने से रोक रही हो! मर्यादा पुरुषोत्तम गृह मंत्री अमित शाह ने संभवतः जांच एजेन्सी को नए आदेश तक प्रतीक्षा करने का निर्देश दिया हो। शाह जी राजनीति के चाणक्य और अजातशत्रु कहे जाते हैं। प्रदेश के कई राज्यों में बहुमत न होने के बावजूद बीजेपी सरकार का गठन कर अपने चातुर्य और कुटिलता का परिचय दिया है। संभव है वह राजनीतिक लाभ हानि का परीक्षण कर रहे हों! भारत में ईश्वर को भी दण्ड दिया गया है। दण्ड का निर्धारण पंडितों के हाथ रहा है। कब ईश्वर को फांसी पर लटकाने से भक्तों की आस्था में प्रचंडता आयेगी उस समय का वह करीने से इन्तजार करते हैं। इस प्रकरण में भी ब्रज भूषण शरण सिंह के बलि वाले दिन के मुहूर्त की शायद प्रतीक्षा हो रही है।
        स्मरण रहे 5 जून 2011को भी दिल्ली के राम लीला मैदान पर एक दाढ़ी और मूंछ वाली परन्तु सलवार धारी योगी महिला का बलात्कार हुआ था। बलात्कार के आरोपी थे दिल्ली पुलिसकर्मी। सरकार थी कांग्रेस की जिसे भारतीय संस्कृति के प्रतिकूल माना जाता था।
आधुनिक गांधी के खिताबधारी अन्ना हजारे को मूंछ और दाढ़ी वाली महिला के बलात्कार की घटना ने व्यथित कर दिया था। बौखलाए अन्ना हज़ारे हज़ारों लोगों के साथ 8जून 2011 को सुबह 10 बजे से सायं 6बजे तक राजघाट पर भूख हड़ताल पर बैठ गए। अब वह चिरनिद्रा में हैं। शायद वर्तमान में जंतर मंतर पर बैठी महिला खिलाड़ी वास्तविक यौन शोषण की शिकार हैं, अन्ना हज़ारे ठहरे काल्पनिक महिला उत्पीड़न शिकार के नायक फलतः संस्कारी सरकार में उन्होंने समाधि लेना श्रेयस्कर समझा! हज़ारे साहब काल्पनिक महिला यौन उत्पीड़न को कैसे बर्दाश्त कर सकते थे। उतर पड़े मूछ दाढ़ी वाली महिला के सम्मान में। यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाए यह सभी वास्तविक हैं और कामुक कामदेव अवतारी ब्रज भूषण शरण सिंह भी साक्षात भगवान हैं। ऐसी दशा में ईश्वर के काम में बाधक बनने का साहस हजारे किस हजारा से लाएं?
     सियासी कुश्ती के पहलू पर भी विश्लेषण की आवश्यकता है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ़ लामबंद हुए किसान आन्दोलन की काली छाया से 2022 विधान सभा के चुनाव में किसी तरह उप्र से बीजेपी निबटने में सफ़ल रही लेकिन छाया हमेशा हमेशा के लिए छटी नही है। चाणक्य के समक्ष एक बड़ी चुनौती थी इस काली छाया को समाप्त करने की। महिला पहलवानों के नेतृत्व में सज गया दंगल। धरने पर बैठने वाले सभी पहलवान महावीर फोगाट अखाड़े से हैं। चरखी दादरी से बबीता फोगाट बीजेपी विधान सभा की उम्मीदवार थीं। मतलब साफ़ है धरने पर बैठे लोग भी बीजेपी समर्थक हैं और ब्रज भूषण शरण सिंह बीजेपी के सांसद ही है। इन दोनों के बीच यौन उत्पीड़न की घटना से इंकार करने का मंतव्य है ही नही। सार्वभौमिक सत्य है यौन शोषण हुआ है। प्रतिष्ठा और चकाचौंध की दुनिया में पैर रखने वाली महिला प्रतियोगियों को शायद हर क्षेत्र में इस घिनौनी यातना का शिकार होना पड़ता है। जब तक उनके पार्श्व में खड़ी बैकिग मजबूत नही होती तब तक वह मजबूर बनी रहती हैं। जैसे ही बैकिग सॉलिड होती है वह वाचाल हो जाती हैं।
         सियासी घड़ी की सूई फिर आकर अटक गई कि आख़िर यौन शोषण के खिलाफ़ आवाज़ बुलन्द करने के लिए इस टाइमिंग का चयन क्यों हुआ? विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया बनाम ब्रज भूषण शरण सिंह के दंगल का यह अखाड़ा सजा क्यों? राजस्थान विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान में जाट डिसाइडिंग वोटर्स हैं। जाट मतदाताओं में कांग्रेस सॉफ्ट कॉर्नर पर आ गई है। इन क्षेत्रों से बीजेपी के पांव उखड़ चुके हैं। बीजेपी का साफ़ होना तय है। जाट मतदाताओं को लुभाने के लिए किसी न किसी को बलि पर चढ़ना ही था। बलि पर चढ़ने वाला व्यक्ति हृष्ट पुष्ट होगा तो दैवीय शक्तियों का प्रसन्न होना तयशुदा है। ब्रज की बलि का जाट मतदाताओं में अच्छा संदेश जायेगा। मोदी जी अभी कर्नाटक में जय बजरंग बली कर रहे हैं फुरसत होते ही यहां के बजरंग पुनिया की याद आ जाय!
         बकरीद के दिन बलि पर चढ़ाने से पहले मुस्लिम जिस तरह बकरे की ख़ूब सेवा करते हैं उसी तरह बीजेपी ब्रज भूषण शरण सिंह की सेवा कर रही है। बीजेपी को भान है कि जाट मतदाताओं को नाराज़ करने से बीजेपी का अस्थि विसर्जन हो जायेगा। रही बात क्षत्रिय मतदाताओं की तो उनकी जनसंख्या जाट की तुलना में काफी कम है। ब्रज भूषण शरण सिंह का प्रभाव क्षत्रिय मतदाताओं पर इतना नही है कि उनकी बलि देने से 8-10 लोकसभा सीट का नुक़सान हो सकता है। उप्र में योगी आदित्यनाथ से बड़ा इस वक्त कोई क्षत्रिय नेता हो भी नही सकता! ब्रज भूषण की बलि बीजेपी को कोई नुकसान कर पायेगी प्रतीत तो नही होता। इसके उलट लाभ होने की संभावना प्रबल है। ब्रज भूषण शरण सिंह अगला लोकसभा चुनाव सपा से लड़ने का प्रयास करेंगे। उनका चुनाव जीतना तय है लेकिन सपा की लुटिया डूबने की संभावना भी बनी रहेगी। बीजेपी काल्पनिक पात्रों, मुद्दों को खूब भुनाना जानती है। डरती है तो सिर्फ़ वास्तविक मुद्दों से। सपा में वास्तविक मुद्दों की या तो समझ नही है या फिर ख़ुद पर भरोसे का संकट है। उधार का सिन्दूर इन्हें ख़ूब भाता है।
       संभव है सारी चालें ब्रज भूषण की जानकारी में हो, परन्तु अब वह कर ही क्या सकते हैं सिवाय एक मूक दर्शक बनने के। अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंस गया है तूं।
पिटता हुआ मोहरा असहाय है। वैसे भी चाणक्य ने चंद्रगुप्त से कई धननंद को मिट्टी में मिलवा दिया है। जहां इतने वहां एक और तर।
गौतम राणे सागर
  राष्ट्रीय संयोजक,
संविधान संरक्षण मंच।

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