युवती के शव को जब पानी से बाहर निकाला तो किसी ग्रामीणों ने
युवती के शव को जब पानी से बाहर निकाला तो किसी ग्रामीणों ने
अभिनेता ठाकुरा मुकेश पाल की संघर्ष की कहानी
अभिनेता ठाकुरा मुकेश पाल की संघर्ष की कहानी
चार्मिंग और चॉकलेटी अभिनेता ठाकुरा मुकेश पाल की संघर्ष और दर्द भरी कहानी। अभिनेता की जिंदगी बच्पन से ही बड़ी संघर्षमयी और दर्दनाक रही है। जन्म के कुछ महीने बाद ही जमींदार दादा को बदमाशों ने बड़ी बेरहमी से मार दिया। माता पिता की आर्थिक हालात अच्छी नही थी कि पढ़ा-लिखाकर कर सही से पालन पोषण कर पाए और कुछ समय बाद डेथ हो गयी। मुकेश बच्पन से ही बहुत सुलझे और सीरियस किस्म के इंसान रहे है समाज मे फैली कुरीतियां, भ्रष्टाचार और निजी जिंदगी की सारी घटनाएं उनके दिमाग पर असर कर रही थीं। हमेशा सोचा करते थे कि इन सब चीजों को कैसे सही किया जाए और समाज को कैसे सही दिशा दी जाए। आर्थिक तंगी और गरीब होने के कारण कौन सुनेगा और कौन पास में बैठाएगा । फिर उन्होंने एक्टर बनने का निश्चय किया और हाई स्कूल पास करने के बाद दिल्ली चले गए। कुछ महीने फुटपाथ और रेलवे स्टेशन पर गुजरे फिर दिल्ली में ही एक ढाबे पर काम करने लगे। खाने और रहने की व्यवस्था बना ली थी पर मंजिल अभी कोसो दूर थी। कभी किसी से सुना था कि दिल्ली में ही मंडी हाउस में एक्टिंग स्कूल चलते है रोज ढाबे पर दिन भर काम करने के बाद रात को मुकेश मंडी हाउस घूमने चला जाया करते थे। ऐसे ही एक दिन अभिनेता की मुलाकात अस्मिता थिअटर के डायरेक्टर अरविंद गौर से हो गयी और उन्होंने मुकेश के बारे में जानने के बाद अपने थिअटर में एडमिशन कर लिया। फिर क्या था यही से शुरू हो गयी मुकेश की एक्टिंग क्लास और ऐसे ही करते करते अभिनेता ने अपनी आगे की पढ़ाई भी पूरी कर ली। अभिनेता की मेहनत और ईमानदारी को देखते हुए ढाबे के मालिक दिन भर काम कराने के बाद शाम को फ्री कर देते थे एक्टिंग क्लास के लिये।
यही पर सालों थिअटर किया और यही पर ही अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ भी कई शो किया।
दिल्ली में ही रहते हुए अपनी पढ़ाई,एक्टिंग और मॉडलिंग की शिक्षाएं पूरी की। जब मुकेश एक बार अपना एक शो करने मुम्बई आए तब उनको लगा कि उनको अब मुम्बई में ही रहकर ही आगे की लक्ष्य की प्राप्ति होगी क्योकि यहाँ रोज कोई न कोई किसी न किसी सीरियल या फ़िल्म का ऑडिशन होता रहता है। पूरी टीम दिल्ली चली गयी पर मुकेश मुम्बई में ही रुक गए। फिर से एक संघर्ष भरी जिंदगी तैयार खड़ी थी। मुम्बई में रहना और खाना आसान नही था। दिन भर ऑडिशन देना और रात को फुटपाथ सहारा रहा। फिर एक दिन ऐसे ही मुलाकात बांद्रा में गैलेक्सी अपार्टमेंट पर अभिनेता सलमान खान के भिखारी से हुई जो मेरठ के रहने वाले थे और लंगड़ा भिखारी के नाम से पूरे बांद्रा में प्रसिद्ध थे उन्ही के साथ रहते हुए लगातार ऑडिशन देते रहे।
कुछ महीनों बाद कुछ काम मिलना शुरू हुआ। अब सब कुछ सही होने लगा था और अपने एक्टर दोस्तो के साथ फ्लैट में शिफ्ट हो गए पर लंगड़े भिखारी से दोस्ती कायम रही।
पर होनी को कुछ और ही मंजूर था । मुकेश बच्पन से ही बड़े स्वाभिमानी और खुदद्दार परवर्ती के रहे है। इंडस्ट्री में फैली नेपोटीजम, कास्टिंगकाउच और खरीद फ़िरोत जैसे चलन को देख नही पा रहे थे। इन शब्दों की परिभाषाओं से भी कोसों दूर थे। अब चीजें समझ आने लगी थी कि अधिकतर सीरियल और फिल्मों की कास्टिंग इन सब चीजों की देन लेन से होती है। यहाँ तक स्टोरी में बदलाव कर सिन और डायलॉग काट दिए जाते थे। जब अभिनेता इन सब चीजों पर ऑब्जेक्शन करने लगे तो लोगों की आंखों में चुभने लगे और एक के बाद एक प्रोजेक्ट वापस ले लिया गया क्योकि इंडस्ट्री में कुछ बड़े प्रोडक्शन और ग्रोउपजियम का ही बोल बाला रहता है। मुम्बई मुकेश को रास नही आया और वापस दिल्ली चले गए और वही पर रहते हुए थिअटर के साथ साथ हिंदी फ़िल्म, हिंदी वेब सीरीज और भोजपुरी सिनेमा में काम करने लगे। और एक रियल इंडियन NGO के संस्थापक भी है। जिससे समाज मे भी सक्रिय रहते है।
ब्यूरो चीफ आलोक तिवारी जनपद मथुरा
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