कमीशन दो, नहीं तो किसी विश्वविद्यालय में काम नहीं करने दूंगा


आगरा यूनिवर्सिटी में कमीशन का खेल, एसटीएफ ने विश्वविद्यालय से कब्जे में लिए अहम दस्तावेज; आरोपित कुलपति फरार,छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एसटीएफ की टीम ने आगरा में डेरा डाल दिया है। एसटीएफ की टीम ने डा. भीमराव अंबेडकर आगरा विश्वविद्यालय के दस्तावेज कब्जे में ले लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछले कई दिनों से एसटीएफ की आगरा यूनिट मामले की पड़ताल कर रही थी। प्रारंभिक जांच में आरोपित कुलपति और उनके करीबी अजय मिश्र के खिलाफ साक्ष्य मिलने के बाद इंदिरानगर थाने में एफआइआर दर्ज की गई थी।उधर, सूत्रों का कहना है कि प्रो. विनय पाठक को पूछताछ के लिए लखनऊ बुलाया गया था। एसटीफ उनसे पूछताछ कर रही है। जल्द ही पाठक को गिरफ्त में लिया जा सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ मुख्यालय की टीम को प्रकरण की विवेचना सौंपी गई। एसटीएफ लखनऊ की टीम भी आगरा में दस्तावेज की जांच कर रही है। एफआइआर दर्ज कराने वाले डिजिटेक्स टेक्नोलाजिज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डेविड मारियो डेनिस ने कुलपति के कहने पीड़ित ने इंटरनेशनल बिजनेस फार्म्स अलवर राजस्थान की कंपनी के पंजाब नेशनल बैंक न्यू रेलवे रोड गुरुग्राम हरियाणा के खाते में रुपये ट्रांसफर किए थे। यह कंपनी किसकी है और खाते से रुपये किसे स्थानांतरित किया गया, इसके बारे में भी एसटीएफ ने बैंक से ब्योरा मांगा है। उधर, एफआइआर दर्ज होने की जानकारी होने के बाद से कुलपति का फोन बंद हो गया है। आरोपित कुलपति सोमवार को भी विश्वविद्यालय नहीं पहुंचे। कुलपति कहां गए, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। माना जा रहा है कि साक्ष्य संकलन के बाद शासन से अनुमति लेकर एसटीएफ कुलपति से पूछताछ करेगी। पूरे प्रकरण की विवेचना शासन की देखरेख में की जा रही है।पर अजय के बताए गए बैंक खाते में कमीशन के 73 लाख रुपये डाले थे। एसटीएफ अब उस बैंक खाते का ब्योरा निकाल रही है।पीड़ित ने कुछ समय पहले वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की शिकायत की थी। इसके बाद गोपनीय जांच की गई। जांच में पता चला कि आगरा विश्वविद्यालय में प्री एवं पोस्ट परीक्षा से संबंधित कार्य के आवंटन में भारी अनियमितता हुई है। पीड़ित से पूछताछ की गई तो उसने कुलपति पर प्रत्येक काम के बदले 15 प्रतिशत कमीशन जबरन वसूलने का गंभीर आरोप लगाया।

यही नहीं, एसटीएफ को पीड़ित ने साक्ष्य भी दिए। पीड़ित ने शुरू में अजय मिश्र को लाखों रुपये नकद दिए, लेकिन 73 लाख रुपये कमीशन नकद देने से पीड़ित ने असमर्थता जताई और खाते में रकम ट्रांसफर कर दिया। एसटीएफ को इसके साक्ष्य भी मिल गए, जिसके बाद रविवार को अजय मिश्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।कमीशन दो, नहीं तो किसी विश्वविद्यालय में काम नहीं करने दूंगा’: पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि कुलपति ने कमीशन नहीं देने पर किसी भी विश्वविद्यालय में काम नहीं करने देने की धमकी दी थी। कहा था कि मेरे संबंध अधिकारियों एवं माफिया से भी है। कहीं पर भी जाओगे कंपनी को कोई मदद नहीं मिलेगी। कमीशन देते रहोगे तो आगे काम करने दूंगा। नकद धनराशि की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी तुम्हारी है। इसके बाद कुलपति ने आइफोन के फेस टाइम एप से पीड़ित की अजय मिश्र से बात कराई। हिदायत दी कि जब बात करना फेस टाइम एप से ही करना। बात होने के बाद काल डिलीट कर देना।

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