अरे! यह क्या हो गया। जब किसी को मदद की जरूरत होती थी तो रिटायर्ड आईपीएस डीसी पांडेय हमेशा खड़े रहते थे। हर संभव मदद करते थे। छोटा हो या बड़ा भेदभाव नहीं करते थे। शनिवार रात रिटायर्ड आईपीएस अफसर की मौत के बाद हर कोई उनके साथ बीते लम्हें याद कर रहा था। कोई उनके द्वारा की गई मदद के बारे में चर्


अरे! यह क्या हो गया। जब किसी को मदद की जरूरत होती थी तो रिटायर्ड आईपीएस डीसी पांडेय हमेशा खड़े रहते थे। हर संभव मदद करते थे। छोटा हो या बड़ा भेदभाव नहीं करते थे। शनिवार रात रिटायर्ड आईपीएस अफसर की मौत के बाद हर कोई उनके साथ बीते लम्हें याद कर रहा था। कोई उनके द्वारा की गई मदद के बारे में चर्चा कर रहा था तो कोई उनकी किताबों के बारे में बात कर रहा था। सब यही कह रहे थे कि इस तरह से मौत पर विश्वास नहीं हो रहा। इंदिरानगर के सेक्टर-18 कॉलोनी में बीती शनिवार रात मकान में आग लगने से रिटायर्ड आईपीएस डीसी पांडेय की मौत हो गई, जबकि पत्नी अरुणा व छोटे बेटे शशांक का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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