शेष नामजद अभियुक्त की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग; 30 नवंबर को मुख्यमंत्री कार्यालय तक विशाल कूच का ऐलान


सिधौली (सीतापुर


मनोज गौतम हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को सिधौली क्षेत्र में जनआक्रोश देखने को मिला। डॉ. आंबेडकर पार्क, बहादुरपुर में आयोजित विशाल धरना-प्रदर्शन में हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। प्रदर्शन में सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, युवाओं और संविधान में आस्था रखने वाले लोगों ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में न्याय की मांग से जुड़े संदेश लेकर शासन-प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग उठाई।

यह धरना-प्रदर्शन डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी परिवार के साथ इस तरह की घटना होना बेहद दुखद है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना केवल उसके परिजनों की लड़ाई नहीं, बल्कि समाज और शासन-प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। लोगों ने मांग की कि मामले में निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

क्या है पूरा मामला?

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, ग्राम लोधौरा, थाना कमलापुर, जनपद सीतापुर निवासी दलित युवक मनोज गौतम की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है। प्रदर्शन में बताया गया कि मामले में पांच नामजद अभियुक्तों में से चार की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक नामजद अभियुक्त अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है।

इसी को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब मामले में नामजद अभियुक्तों की पहचान और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, तो शेष अभियुक्त की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने मांग की कि पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शेष अभियुक्त को तत्काल गिरफ्तार करे और विवेचना को पारदर्शी तरीके से पूरा करे।

लोगों का कहना था कि हत्या जैसी गंभीर घटना से प्रभावित परिवार को केवल आश्वासन देकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि उसे आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर ठोस सहायता मिलनी चाहिए। पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि परिजन और गवाह बिना किसी भय के न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग कर सकें।

पांच प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

धरना-प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार सिधौली के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, जिलाधिकारी सीतापुर और पुलिस अधीक्षक सीतापुर को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पीड़ित परिवार की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।

पहली मांग मामले के शेष नामजद अभियुक्त की तत्काल गिरफ्तारी की गई। दूसरी मांग प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की रही। तीसरी मांग पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की रखी गई। चौथी मांग परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की उठाई गई। पांचवीं मांग पीड़ित परिवार और मामले के गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने की रही।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आर्थिक सहायता मिलने से परिवार को जीवनयापन और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। साथ ही सरकारी नौकरी मिलने से परिवार को स्थायी आर्थिक सहारा प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने शासन से मांग की कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किया बड़े आंदोलन का ऐलान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि मनोज गौतम के परिवार को न्याय दिलाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित परिवार को न्याय के लिए बार-बार दर-दर भटकना पड़े, यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि महासंघ का उद्देश्य संविधान के दायरे में रहकर पीड़ितों, शोषितों और वंचितों की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है। मनोज गौतम के परिवार की मांगों को लेकर संगठन लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह संघर्ष समाप्त नहीं होगा।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने घोषणा करते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा शीघ्र शेष नामजद अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं की गई और पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता सहित अन्य मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी 30 नवंबर 2026 को हजारों की संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक कूच करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से किया जाएगा। उन्होंने शासन-प्रशासन से समय रहते मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की और कहा कि आगामी आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दिखाई एकजुटता

धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में नंदलाल गौतम, विपिन कुमार गौतम, श्रीपाल गौतम, लाल गौतम, रामनाथ गौतम, संतोष कुमार गौतम, राकेश कुमार गौतम, अशोक कुमार गौतम, पप्पू, गुड्डू गौतम, बबलू, राधेश्याम गौतम, राधेलाल, गजोधर प्रसाद, भौरिंद्र बुद्ध गौतम, अशोक गौतम, संतोष गौतम एवं लक्ष्मी गौतम सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय होने पर सभी को एकजुट होकर उसकी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और न्याय पाने का अधिकार देता है। इसलिए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए।

किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, अन्याय के खिलाफ है संघर्ष

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी जाति, धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं है। इसका उद्देश्य अन्याय, अत्याचार, भेदभाव और मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध आवाज उठाना है। आयोजकों ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

उन्होंने शासन-प्रशासन से अपील की कि मनोज गौतम हत्याकांड को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की जाए। साथ ही शेष अभियुक्त की गिरफ्तारी, परिवार की सुरक्षा और आर्थिक सहायता के संबंध में ठोस कदम उठाए जाएं।

धरना-प्रदर्शन के दौरान लोगों ने एक स्वर में न्याय की मांग दोहराई। अब सभी की निगाहें शासन-प्रशासन की आगामी कार्रवाई और 30 नवंबर को प्रस्तावित लखनऊ कूच पर टिकी हैं। आयोजकों ने संकल्प लिया कि मनोज गौतम के परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे भी जारी रहेगा।

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