जौनपुर/मड़ियाहूं मडियाहूँ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य के


*मडियाहूँ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर संगोष्ठी आयोजित*

 जौनपुर/मड़ियाहूं 

 मडियाहूँ स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य के शारीरिक, आर्थिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक एवं मनोवैज्ञानिक पक्षों को रेखांकित करते हुए स्वस्थ और संतुलित जीवन के महत्त्व पर प्रकाश डाला।

डॉ. आञ्जनेय पांडेय ने कार्य एवं आनंद के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जेन जी (Gen Z) जैसे पीढ़ीगत वर्गीकरणों की प्रासंगिकता पर प्रश्न उठाते हुए इस बात पर विचार करने की आवश्यकता बताई कि ऐसे वर्गीकरणों के माध्यम से युवाओं के व्यवहार और जीवन-दृष्टि को किस सीमा तक समझा जा सकता है।

डॉ. उमेश राव ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए शारीरिक स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली के महत्त्व को रेखांकित किया।

डॉ. विवेक कुमार मिश्र ने मानसिक स्वास्थ्य के आर्थिक आयाम पर चर्चा करते हुए सुख एवं संतुष्टि के बीच अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आर्थिक आय और भौतिक संसाधनों और संतुष्टि के अतिरिक्त जीवन में सुख तथा मानसिक प्रसन्नता के अन्य कारक भी महत्त्वपूर्ण होते हैं।

डॉ. जितेंद्र पाल ने मानसिक स्वास्थ्य के भौगोलिक आयाम पर प्रकाश डालते हुए व्यक्ति के परिवेश और भौगोलिक परिस्थितियों के उसके जीवन तथा मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा की।

डॉ. आशुतोष शर्मा ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मानसिक समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक समस्याओं को समझने में ऐतिहासिक दृष्टिकोण की उपयोगिता को रेखांकित करते हुए इस विषय के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए।

डॉ. विवेक सिंह ने भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. अमिताभ कुमार ने “Brevity is the soul of wit” अर्थात् संक्षिप्तता ही अभिव्यक्ति की प्रभावशीलता का सार है—इस उक्ति के माध्यम से विचारों की स्पष्टता और संक्षिप्त अभिव्यक्ति के महत्त्व को रेखांकित किया। डॉ. अमिताभ कुमार एवं डॉ. जय प्रकाश दुबे ने शिक्षा एवं मनोविज्ञान से संबंधित पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग के  विभागाध्यक्ष डॉ. दया सिंधु ने किया। उन्होंने विषय के विभिन्न पक्षों को जोड़ते हुए कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया।

अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो एस. के. पाठक ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी या तनाव की अनुपस्थिति तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे शारीरिक स्वास्थ्य, आर्थिक परिस्थितियों, सामाजिक एवं भौगोलिक परिवेश, ऐतिहासिक दृष्टिकोण, शिक्षा, कार्य-जीवन संतुलन और व्यक्तिगत संतुष्टि के व्यापक संदर्भ में समझना आवश्यक है।

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Bhanu Pratap Dixit

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भानु प्रताप दीक्षित अबतक टीवी के ऑफिस में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे सीनियर को-एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं।

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