केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर के बाहर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का धरना शुरू हो गया है. उनकी मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें पिछले चार महीनों से अपना मानदेय या भुगतान नहीं मिला है.


मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के घर के बाहर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का धरना शुरू हो गया है. कई जिलों की महिलाएं केंद्रीय मंत्री के घर के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी कर रही हैं. महिलाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वो यहां से नहीं हटेंगी.

 

वहीं, भोपाल के अंबेडकर पार्क में राज्य के महिला स्वयं-सहायता समूहों की सदस्यों और महिला रसोइयों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन और धरना दिया. महिलाओं ने लिंक रोड नंबर 1 पर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिससे ट्रैफिक में रुकावट आई. उनकी मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें पिछले चार महीनों से अपना मानदेय या भुगतान नहीं मिला है.

स्वयं सहायता समूह की प्रमुख मांगे

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि जून महीने से इनका मानदेय नहीं मिला है. खाद्यान्न के लिए जो पैसा दिया जाता है, वह भी नहीं मिला है. सीएम राइज स्कूल में छोटे सरकारी स्कूलों को मर्ज करने की वजह से कई रसोइयों की नौकरी खतरे में आ गई है. एक रसोईया को ₹4000 प्रति माह दिया जाता है. प्रति बच्चा ₹6.50 रुपए प्रतिदिन खाद्यान्न के लिए दिया जाता है. इसमें से कोई भी पैसा जून महीने के बाद से नहीं दिया गया है.

 

सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग

इससे पहले, भोपाल में हुए ‘राइट टू फूड’ के अधिकार’ सम्मेलन में देश भर के रसोइयों, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सुरक्षित, पक्की नौकरी देने की मांग भी उठाई गई थी. महिलाओं ने बताया कि वे स्कूलों और अन्य संस्थानों में बच्चों को खाना खिलाने का काम तो कर रही हैं, लेकिन मानदेय और खाने का सामान मिलने से जुड़ी दिक्कतों के कारण उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है.

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