BRICS Summit को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार की विदेश नीति, चीन, वेस्ट एशिया और कूटनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए हैं. वहीं शशि थरूर ने समिट को भारत के लिए बड़ा सम्मान बताया.
- कांग्रेस ब्रिक्स समिट को लेकर सरकार पर हमलावर है, हालांकि इसे लेकर पार्टी के अंदर कुछ मतभेद भी दिखे. मुख्य रूप से कांग्रेस ने ठोस लाभ, विदेश नीति (खासकर चीन और वेस्ट एशिया), कूटनीतिक भूमिका और आयोजन के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए हैं.
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- पहले ही पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि पिछले 2-3 ब्रिक्स समिट से कोई ठोस नतीजा या लाभ नहीं दिखा. भारत ब्रिक्स, SCO, G20 और QUAD का सदस्य है, लेकिन इनसे देश को क्या मिला, यह साफ नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले के समिट में कुछ tangible benefits थे, अब नहीं.
- हालांकि भाजपा ने इसे नाराज फूफा वाली मानसिकता बताया और कहा कि भारत की तरक्की पचा नहीं पा रही है.
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- ब्रिक्स पर खुर्शीद ने कही ये बात
- कांग्रेस के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत को ब्रिक्स चेयरमैनशिप का इस्तेमाल करके अपनी ऐतिहासिक कूटनीतिक प्रतिष्ठा और स्पेस बहाल करनी चाहिए. पार्टी ने आरोप लगाया कि वेस्ट एशिया संकट में सरकार की भूमिका सीमित रही.
- ईरान (ब्रिक्स सदस्य) पर हमलों के कथित समर्थन या सहमति की धारणा बनी. दक्षिण अफ्रीका जैसे सदस्यों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला.घोषणाओं के साथ ठोस कार्रवाई होनी चाहिए.
- उन्होंने नैतिक नेतृत्व, रणनीतिक स्पष्टता, Contingent Reserve Arrangement को लागू करने, सप्लाई चेन मजबूत करने और UN सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन जुटाने की मांग की.
- शाकाहारी मेन्यू पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
- कांग्रेस ने मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात, सीमा विवाद (लद्दाख, अरुणाचल), ऑपरेशन सिंदूर में चीन की कथित भूमिका, और चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे (लगभग 112 अरब डॉलर) पर सवाल उठाए. साथ ही कहा कि सीमा पर रियायतें दी गईं और आर्थिक निर्भरता खतरनाक है. कांग्रेस का ये भी मानना है कि प्रधानमंत्री को चीन से क्षेत्र खाली कराने की मांग साफ करनी चाहिए.
- शाकाहारी मेन्यू: विदेशी मेहमानों को सिर्फ शाकाहारी भोजन परोसने पर कांग्रेस (राहुल गांधी सहित) ने आपत्ति जताई. पार्टी ने झुग्गियों को हरे पर्दों से छिपाने पर हमला बोला. पहलगाम आतंकी हमले की निंदा पर सवाल (अपराधियों का नाम न होना), और बैंडुंग स्पिरिट (नेहरू युग) का जिक्र आने पर भी कांग्रेस ने नेहरू के नोट्स शेयर करते हुए व्यंग्य किया.
- ब्रिक्स पर मतभेद खुलकर आया आमने
- हालांकि शशि थरूर ने चिदंबरम का जवाब देते हुए कहा कि भारत में ब्रिक्स समिट होना बड़े सम्मान और कूटनीतिक क्षमता की बात है. ब्रिक्स विश्व की ज्यादातर आबादी और GDP का बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है. भाजपा ने इसे कांग्रेस एक्सपोज कांग्रेस बताया.
- कुल मिलाकर, कांग्रेस ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के मंच के रूप में स्वीकार करती है और याद दिलाती है कि मनमोहन सिंह काल में न्यू डेवलपमेंट बैंक का प्रस्ताव आया था, लेकिन मौजूदा सरकार पर आरोप है कि वह इसे रणनीतिक रूप से सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रही और चीन/वेस्ट एशिया नीति में कमजोर दिख रही है. भाजपा इसे नकारात्मकता फैलाने और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को न पचा पाने का आरोप लगाती है.
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