आमोद कुमार


 आमोद कुमार 
बांदा। शिक्षक दिवस पर जब शिक्षा के उजाले और गुरु के सम्मान की बातें हो रही थीं, उसी दिन ग्राम बजरंगपुरवा में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय के बाहर समाजवादी पार्टी ने चौपाल लगाकर सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। बंद स्कूल की चौखट पर हुई यह चौपाल महज राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की उस तस्वीर को सामने लाने की कोशिश थी, जहां स्कूल का ताला बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।सपा नेता ओम नारायण त्रिपाठी ‘विदित’ ने कहा कि विद्यालय केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि गांव के गरीब और वंचित बच्चों के सपनों की पहली पाठशाला हैं। यदि किसी विद्यालय में कमियां हैं तो समाधान ताला लगाना नहीं, व्यवस्था सुधारना होना चाहिए। पर्याप्त शिक्षक, मजबूत भवन और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि जिस दिन शिक्षक दिवस पर शिक्षा के महत्व का गुणगान किया जा रहा है, उसी दिन बंद स्कूलों का मुद्दा यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या गांव के बच्चों के लिए शिक्षा का उजाला केवल भाषणों तक सीमित रह जाएगा?
सपा नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि वर्ष 2027 में सपा सरकार बनने पर बंद पड़े प्राथमिक विद्यालयों को पुनः संचालित कराया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
चौपाल में लोकसभा प्रभारी उमेश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष इमरान अली राजू, जिला मीडिया प्रभारी प्रमोद गुप्ता ‘राजा’, विधानसभा अध्यक्ष लालमन यादव, रामलाल प्रजापति, राजन चंदेल, सरताज खान, रोहित प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।