आमोद कुमार


आमोद कुमार 
बांदा के कमासिन थाना क्षेत्र के ग्राम खमरखा में हुई मासूम बच्ची की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के विवेक को झकझोर देने वाली त्रासदी है। आपसी विवाद की आग में जब मासूमों का बचपन और जीवन झुलसने लगे, तो यह केवल कानून का नहीं, बल्कि पूरे समाज के चरित्र का भी प्रश्न बन जाता है।
करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने इस मामले में वांछित अभियुक्ता रामकली पत्नी रामप्रकाश उर्फ छोट्टन को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में थाना कमासिन पुलिस की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि कानून देर से सही, लेकिन अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास करता है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक महेंद्र प्रताप सिंह, हेड कांस्टेबल रामायण सिंह, कांस्टेबल सूर्यप्रकाश सिंह, महिला कांस्टेबल रोली रजक और महिला कांस्टेबल संध्या सिंह शामिल रहे।फिर भी न्याय की तस्वीर अभी अधूरी है। पुलिस के अनुसार इस मामले का एक अन्य वांछित आरोपी अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है। ऐसे में यह आवश्यक है कि शेष आरोपी को भी जल्द गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया को पूर्ण किया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को यह विश्वास मिल सके कि कानून किसी भी दोषी को छूट नहीं देता।यह घटना हमें याद दिलाती है कि गुस्से में उठाया गया एक हाथ केवल सामने वाले को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को जीवनभर का दर्द दे सकता है। जब व्यक्तिगत विवादों का निशाना मासूम बच्चे बन जाएं, तो यह केवल अपराध नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी हार है।मासूम बच्ची अब कभी लौटकर नहीं आएगी, लेकिन उसकी मौत यह सवाल हमेशा पूछती रहेगी कि क्या हम अपने क्रोध पर इतना भी नियंत्रण नहीं रख सकते कि किसी निर्दोष की जान बची रहे? कानून अपना काम कर रहा है, अब समाज को भी आत्ममंथन करना होगा।

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