बांदा बरसात केवल पानी नहीं लाती, बल्कि प्रशासन की तैयारियों की भी परीक्षा लेती है। जब नदियां उफान पर होती हैं, तब राहत कार्यों की नहीं, बल्कि पहले से की गई तैयारियों की असली कसौटी सामने आती है। इसी सोच के साथ जलशक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने पैलानी तहसील के ग्राम नांदादेव मजरा शंकरपुरवा में आयोजित आपदा प्रबंधन चौपाल में साफ शब्दों में कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियां पूरी तरह चाक-चौबंद हों, किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।चौपाल में जिलाधिकारी अमित आसेरी, पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल, मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार पाण्डेय तथा अन्य अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना पर अमल करने के निर्देश दिए। मंत्री ने शंकरपुरवा के कच्चे मार्गों पर तत्काल लाल मिट्टी डलवाने और नदी कटान रोकने के लिए पिचिंग कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए, ताकि बरसात के दौरान ग्रामीणों का संपर्क न टूटे।जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बाढ़ प्रभावित गांवों में पीए सिस्टम और सोलर पैनल लगाने, एक सप्ताह के भीतर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने तथा चकरोडों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। वहीं एसडीएम पैलानी अंकित वर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएचसी जसपुरा के अधीक्षक डॉ. पवन पटेल ने बताया कि 18 मेडिकल टीमें गठित कर दी गई हैं। आवश्यक दवाएं, क्लोरीन और ब्लीचिंग पाउडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं तथा संभावित प्रसव वाली महिलाओं का पहले ही चिन्हीकरण कर लिया गया है, ताकि आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बाधा न आए।पशुओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को टीकाकरण, जियोटैगिंग और भूसा-चारा की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही गांव स्तर पर पांच सदस्यीय निगरानी समिति गठित करने और पर्याप्त संख्या में नावों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया।पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने कहा कि संभावित बाढ़ को देखते हुए पुलिस और पीएसी को पहले से सतर्क कर दिया गया है तथा ग्रामीणों से प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है।यह चौपाल केवल निर्देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हर वर्ष बाढ़ के बाद राहत कार्यों की चर्चा होती है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब इस बार समय रहते की गई तैयारियां किसी गांव को डूबने, किसी परिवार को विस्थापित होने और किसी जीवन को संकट में पड़ने से बचा सकें। आपदा के समय सबसे बड़ी राहत वही होती है, जिसकी तैयारी पहले से कर ली गई हो।
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